समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना किसी के भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। यह उन श्रमिकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी 65 वर्षीय कचरा बीनने वाले मोहन लाल (बदला हुआ नाम) की कहानी दर्शाती है कि सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का सहयोग किस तरह कमजोर वर्ग के श्रमिकों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से उबरने और बेहतर व स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ने में मदद कर सकता है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले मोहन लाल ने अपने जीवन का अधिकांश समय संविदा सफाई कर्मचारी और कचरा बीनने वाले व्यक्ति के रूप में काम करते हुए बिताया। इस काम से उन्हें प्रतिदिन केवल 101 से 250 रुपये तक की कमाई होती थी। उनकी यह सीमित आय परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में ही मुश्किल से खर्च हो जाती थी। ऐसे में बचत करना या अचानक आने वाले खर्चों के लिए पैसे जुटाना उनके लिए बेहद कठिन था। इसी बीच, मोहन लाल को हृदय में गंभीर अवरोध होने का पता चला, जिसके उपचार के लिए विशेष चिकित्सा की आवश्यकता थी। इलाज पर आने वाला भारी खर्च मोहन लाल और उनके परिवार के लिए बड़ी चिंता बन गया।
नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते) योजना के कचरा बीनने वाले श्रमिकों से जुड़े घटक के तहत पंजीकृत मोहन लाल को आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड मिला। इस सुविधा की मदद से 8 मई, 2026 को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनके हृदय में हुए अवरोध का इलाज संभव हो सका। उनके उपचार का पूरा खर्च योजना के तहत वहन किया गया था।
सफल उपचार के बाद मोहन लाल स्वस्थ हो गए और दोबारा काम पर लौटकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने लगे। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मिलने से आपातकालीन चिकित्सा पर होने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ और उन्हें अपनी सेहत में सुधार पर ध्यान देने का अवसर मिला। समय पर मिले इलाज ने मोहन लाल का आत्मविश्वास लौटाया और भविष्य के प्रति नई उम्मीद जगाई।
मोहन लाल का सफर कचरा बीनने वालों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के श्रमिकों के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं तथा सामाजिक सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। उनके स्वस्थ होने की कहानी दर्शाती है कि किस तरह कल्याणकारी योजनाएं आवश्यक उपचार में आने वाली बाधाओं को दूर करने, लोगों की गरिमा बनाए रखने और उनके परिवारों के कल्याण को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि समय पर मिलने वाली सहायता लोगों को कठिन परिस्थितियों से उबरने, आत्मविश्वास दोबारा हासिल करने और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ आगे बढ़ने में मदद कर सकती है।
पीके/केसी/आरटी/एनके/एसएस
