केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने जम्मू-कश्मीर के जम्मू संभाग के सांबा जिले के विजयपुर स्थित चक ज्वाला गांव में दिव्यांगजनों के कौशल विकास, पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए बनाए जा रहे समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी), जम्मू के स्थायी परिसर का दौरा किया। उन्होंने चल रहे निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की।
करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस स्थायी परिसर से क्षेत्र में पुनर्वास और सहायता सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे दिव्यांगजनों को अधिक आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि स्थायी परिसर से सीआरसी जम्मू की संस्थागत क्षमता मजबूत होगी और क्षेत्र के दिव्यांगजनों को पुनर्वास, शिक्षा तथा सहायता सेवाएं अधिक व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह केंद्र जम्मू शहर में सीमित स्तर पर काम कर रहा है। नए परिसर से इसकी सेवाओं का विस्तार हो सकेगा।
केंद्रीय मंत्री के साथ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। इनमें दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री राजीव शर्मा शामिल थे।
इस दौरान, सीआरसी जम्मू की निदेशक डॉ. रोनिका शर्मा ने मंत्री को निर्माण कार्य की प्रगति, अब तक पूरे हो चुके कार्यों और बाकी कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने स्थायी परिसर को समय पर पूरा करने और चालू करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं तथा अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं से भी अवगत कराया।
डॉ. शर्मा ने परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं और अन्य पहलुओं की जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी। परिसर के चालू होने के बाद यहां दिव्यांगजनों के पुनर्वास, विशेष शिक्षा, शुरुआती हस्तक्षेप, कौशल विकास और सशक्तीकरण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस दौरान निर्माण कार्य की स्थिति का आकलन किया गया और शेष कार्यों में तेजी लाने के लिए आवश्यक उपायों की समीक्षा की गई।
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने परियोजना को समय पर पूरा करने और दिव्यांगजनों को प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उचित बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि सीआरसी जम्मू का स्थायी परिसर स्थापित होना जम्मू क्षेत्र में पुनर्वास सेवाओं, विशेष शिक्षा, शुरुआती हस्तक्षेप, कौशल विकास और दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण से जुड़ी गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस केंद्र का उद्देश्य दिव्यांगजनों को पुनर्वास संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराना और उनके लिए उपयुक्त उपचार, सहायता तथा कौशल विकास के अवसर सुनिश्चित करना है।
डॉ. कुमार ने कहा कि केंद्र में दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए फिजियोथेरेपी और विशेष प्रशिक्षण की सुविधा दी जाएगी। दिव्यांग बच्चों की बेहतर देखभाल में मदद के लिए उनके माता-पिता और देखभाल करने वालों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि केंद्र में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र स्थापित किया जाएगा। इससे दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, दिव्यांगता से संबंधित बीएड और एमएड जैसे पाठ्यक्रम शुरू करने की भी योजना है। इससे शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और दिव्यांगजनों के पुनर्वास तथा सशक्तीकरण के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बेहतर होंगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस केंद्र में कृत्रिम अंगों और अन्य सहायक उपकरणों की माप, निर्माण तथा फिटिंग के लिए प्रयोगशालाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं से लाभार्थियों को रोजमर्रा के काम अधिक आसानी और आत्मनिर्भरता के साथ करने में मदद मिलेगी।
समावेशी विकास पर बल देते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि दिव्यांगजनों का सशक्तीकरण ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि सीआरसी जम्मू क्षेत्र में लंबे समय से महसूस की जा रही व्यापक पुनर्वास केंद्र की जरूरत को पूरा करेगा। इससे बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, दिव्यांगजनों को उनके नजदीक ही संबंधित सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों को सहायता देने से उनके परिवार भी मजबूत होंगे और वे समाज तथा देश के विकास में अधिक योगदान दे सकेंगे।
इस समीक्षा से जम्मू-कश्मीर में दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सशक्तीकरण की सेवाओं के लिए संस्थागत क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से निर्माण परियोजना को समय पर पूरा करने के महत्व की पुष्टि हुई।
उल्लेखनीय है कि सीआरसी जम्मू, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अंतर्गत, नई दिल्ली स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शारीरिक दिव्यांगजन संस्थान के माध्यम से संचालित होता है।
पीके/केसी/आरटी/एसके/एसएस
