भारत माता की जय।
गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, उप-मुख्यमंत्री भाई हर्ष संघवी जी, विधानसभा अध्यक्ष श्रीमान शंकरभाई चौधरी, गुजरात सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, अन्य जनप्रतिनिधि, भाइयों और बहनों।
आज टेक्नोलॉजी से भी हमारे साथ देश के सभी जिलों के किसान जुड़े हुए हैं। आज टेक्नोलॉजी से हमारे साथ गुजरात के हर एक गांव के किसान जुड़े हुए हैं। राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री, ये सब आज किसानों के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हमारे साथ हैं। मैं उन सबका भी हृदय से स्वागत करता हूं।
आज बनासकांठा ने अपना रूतबा जमाया है। अभी स्क्रिन पर देख रहा था कि शायद दुनिया में इतनी बड़ी चारपाई (खाटला) सभा कभी नहीं हुई होगी। देश के लोगों के लिए भी अजूबा होगा कि इस सभा में सारे लोग चारपाई पर बैठे हुए हैं। हमारे गांव की इस महान परंपरा को आज हमारे बनासकांठा ने जीवित कर दिया है। अगर शायद पहले से आपने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड वालों को बोला होता, तो वो जरूर आज एक रिकॉर्ड के रूप में उसको दर्ज कर देते। अभी यहां उल्लेख हुआ।
आप लोगो ने मुझे जो जिम्मेदारी दी थी उसे पूरा करते हुए आज 25 वर्ष हो गए हैं। और संजोग देखो कि 25 वर्ष पूरे होने के बाद मेरा प्रथम आगमन हमारे बनासकांठा में हुआ। आप लोगों को याद दिला दूँ कि 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहला सबसे बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम, मुख्यमंत्री बनने के बाद का पहला कार्यक्रम, सार्वजनिक कार्यक्रम, वो डिसा में किया था, लोक कल्याण मेला, जो पुराने लोगों होंगे उन्हे याद होगा। और वो कार्यक्रम शायद ऐतिहासिक कार्यक्रम रहा, एक जिले से तीन लाख लोग उस कार्यक्रम में थे, मैं नहीं मानता कि वो रिकॉर्ड आज तक किसी ने तोड़ा हो। वो रिेकॉर्ड बनासकांठा के खाते में दर्ज है। जहाँ से यात्रा की शुरूआत की थी, वहाँ 25 वर्ष की सेवा यात्रा का हिसाब देने का मुझे आज अवसर मिला है।
नवरात्र के कुछ ही दिन बाद माँ अंबा की पावन भूमि पर आने का अवसर मिला है। मैं, माँ अंबा के चरणों में प्रणाम करता हूँ। थोड़ी देर पहले यहां से मातृशक्ति के लिए, बच्चों के लिए, किसानों-पशुपालकों के लिए, अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। देश के करोड़ों छोटे किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की नई किश्त भी पहुंची है। मैं गुजरात के लोगों को, देशवासियों को, देशभर के किसानों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।
एक तो मुझे गुजरात के और बनासकांठा के लोग माफ करें, मुझे हिन्दी इसलिए बोलना पड़ेगा, क्योंकि देशभर के लोग हमारे साथ कार्यक्रम में जुड़े हैं, तो आपकी परमिशन है न कि मैं हिन्दी में बोलूं? शाबाश।
हमारे किसान, हमारे अन्नदाता, विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है, और हमारी सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण को, किसानों को सशक्त करने को प्राथमिकता दी है। 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट अब 5 गुणा से अधिक हो गया है। पीएम किसान सम्मान निधि, अब करोड़ों छोटे किसानों के जीवन का हिस्सा बन गई है। आज करीब 10 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई है। गुजरात के 50 लाख से अधिक किसानों को भी इसका लाभ मिला है। इनके खातों में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए हैं। यहां बनासकांठा के लाखों किसान परिवारों के खाते में भी करीब 50 करोड़ रुपये पहुंचे हैं।
बीते वर्षों में हमारी सरकार की नीतियों की वजह से 50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा किसानों को मिले हैं या उनकी बचत हुई है, 50 लाख करोड़ रुपया। मैं आपको सिर्फ पांच योजनाओं का उदाहरण दूंगा। पीएम किसान सम्मान निधि के करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपए सीधे छोटे किसानों के बैंक खाते में पहुंचे हैं। बेन तुने मुझे पराजित किया, मुझे था कि तुम थोड़ी देर में बैठ जाओगी, तेरे हाथ दर्द करते होंगे। हमारे एसपीजी के लोगों को विनती है कि यह बेटी सरस फोटो बनाकर लाई है, उससे ले लीजिए, वरना वह हाथ ऊपर उठाकर थक जाएगी। यहाँ से ले लेंगे बेटा, यहाँ से वहां आयेंगे, तुम यहीं खड़ी रहो, जरा एसपीजी के लोग जाकर के इसको कलेक्ट कर लें। आजादी के बाद कभी इन छोटे किसानों की जरूरतों को नहीं समझा गया, कभी उन्हें पूछा नहीं गया। जबकि देश में छोटे किसानों की संख्या 85 प्रतिशत से ज्यादा है। हमारे देश में छोटे किसानो की संख्या 85 प्रतिशत है। ऐसे छोटे किसानों की हमारी सरकार ने ही चिंता की और उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि से मदद पहुंचाई।
बीते कुछ सालों में वैश्विक अनिश्चिता के बीच खाद की कीमतों में बहुत उछाल आया, लेकिन किसानों को समर्पित हमारी सरकार ने इसका बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। इस पर सरकार ने करीब 16 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं। आप लोगों को खाद सस्ता मिले, इसलिए तिजोरी में से 16 लाख करोड़ रूपये देने पड़े है ताकि आप लोगों पर बोझ न आए।
पहले की सरकारें MSP को लेकर भी किसानों को धोखा ही दे रही थीं, लेकिन ये हमारी सरकार है, जिसने MSP का वायदा पूरा किया है। पिछले 12 वर्षों में, गेहूं और धान किसानों को गेहूँ और चावल, ऐसे किसानो को एमएसपी के रूप में 24 लाख करोड़ रूपये, 24 लाख करोड़ रूपया किसानों के खाते में गये हैं।
हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का एक बहुत सशक्त सुरक्षा कवच किसानों को दिया है। हमने किसान बीमा योजना शुरू की, बड़े तौर पर शुरू की। पिछले 10-12 वर्षों में किसानों को फसल बीमा के मुआवजे में भी 2 लाख करोड रुपए से अधिक मिल चुके हैं। खेती को नुकसान हुआ, तब बीमा के रूप में किसानों के पास 2 लाख करोड़ रूपये पहुंचे हैं। हमारा निरंतर प्रयास है कि सिंचाई पर किसान की लागत भी कम हो, इसमें पीएम कुसुम योजना की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसके तहत, अभी तक करीब 12 लाख सोलर पंप दिए जा चुके हैं। 12 लाख सूर्य ऊर्जा से चलने वाले पंप, पानी निकालने के लिए किसानों को दिए गए हैं, 12 लाख पंप। और उसके कारण बिजली की जरूरत, डीजल की जरूरत सब हो गया। अगर ये सोलर पंप न मिलते, तो 80 करोड़ से अधिक, 80 करोड़ लीटर से, 80 करोड़ लीटर से अधिक का डीजल किसानों को खरीदना पड़ता। यानि इसमें जो पैसा लगता, वो इन लाखों किसानों की बचत हुई है। और इससे, जो अतिरिक्त बिजली पैदा हुई, वो अलग। एक तरह से देखें, तो सिर्फ इन पांच योजनाओं या निर्णयों की वजह से देश के किसानों को 50 लाख करोड़ रुपए के बराबर की बचत भी हुई है या तो जमा हुए हैं। 50 लाख करोड़ रुपये का आँकड़ा बहुत बड़ा है। इन 50 लाख करोड़ रुपयों ने देश के किसानों की आय बढ़ाई है, भारत में खेती का सामर्थ्य बढ़ाया है।
खेती हमारे देश की परंपरा भी है, खेती हमारी संस्कृति भी है, Agriculture is our culture. पिछले 12 वर्षों में हमारी सरकार ने खेती में साइंस और टेक्नोलॉजी का भी व्यापक समावेश किया है। हमने खेती को, पशुपालन को वैज्ञानिकता से जोड़ा है। सॉयल हेल्थ कार्ड इसका बेहतरीन उदाहरण है। पहले किसान को ये पता लगाने में मुश्किल होती थी कि उसके खेत को कौन सी खाद चाहिए, कितनी मात्रा में चाहिए। सॉयल हेल्थ कार्ड ने इस समस्या का समाधान किया है। आज 26 करोड़ से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड देश के किसानों के पास हैं। इनसे खेती के तौर-तरीकों में आधुनिकता आई है।
किसान के लिए मौसम में हो रहा बदलाव बहुत बड़ी चुनौती है। इसलिए, हमारा प्रयास है कि किसान को लगातार बीजों की नई किस्में उपलब्ध हों, जो बदलती जलवायु के अनुकूल हो। बीते वर्षों में बीजों की करीब तीन हज़ार नई किस्में किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं।
पशुपालन हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है, इसमें हमारी बहनों की बहुत बड़ी भागीदारी है। बीते दशक में हमने पशुपालन और डेयरी सेक्टर में भी विज्ञान और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर दिया है। क्योंकि पशु की नस्ल बेहतर होगी, तो दूध उत्पादन बढ़ेगा। अभी शंकर भाई बता रहे थे कि चार गाय से जितना दूध मिलता है, हम चाहते हैं कि एक ही गाय से उतना मिले। समय पर टीकाकरण और इलाज मिलेगा, तो बीमारी से होने वाला नुकसान कम होगा। यानी, पशु स्वस्थ होगा, तो मेरे पशुपालक भाई-बहनों की कमाई भी बढ़ेगी।
आप राष्ट्रीय गोकुल मिशन के बारे में जानते हैं। इसके तहत देशी नस्लों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बनासकांठा में बना नया रिसर्च सेंटर इस मिशन को और मजबूती देगा। यहां गीर, साहीवाल और कांकरेज जैसी देशी गायों और मेहसाणा, मुर्रा तथा जाफराबादी जैसी भैंसों की नस्लों का संरक्षण होगा। साथ ही, उनकी गुणवत्ता बढ़ाने में भी बहुत बड़ा काम होगा। कांकरेज नस्ल के लिए तो देश में अपनी तरह की यह पहली सुविधा है। इसे एक उदाहरण से समझिए, अगर किसी किसान के पास अच्छी नस्ल की गाय है, जो ज्यादा दूध देती है और कम खर्च में स्वस्थ रहती है, तो वह चाहेगा कि गाय की आने वाली पीढ़ी में भी ये गुण बने रहें। IVF जैसी आधुनिक तकनीक इसमें मदद करती है। इससे अच्छी नस्ल के गुण अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की संभावना बढ़ती है। इसका सीधा लाभ पशुपालक को मिलेगा।
पशुओं को बीमारियों से बचाना भी हमारी प्राथमिकता है। खुरपका और मुंहपका बीमारी से पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन, दोनों पर असर पड़ता है। इसलिए हमने देशभर में मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू किया। अब तक करीब डेढ़ सौ करोड़ टीके पशुओं को लगाए जा चुके हैं। 8 करोड़ से अधिक किसानों के पशुओं को मुफ्त टीके लगे हैं। इससे पशुपालकों का, उनका जो खर्च का बोझ है, वो भी कम हुआ है।
इन प्रयासों का असर दूध उत्पादन में भी दिख रहा है। वर्ष 2013-14 में एक गाय या भैंस, उससे औसतन एक दिन में 5 लीटर से भी कम दूध मिलता था। आप लोगों ने मुझे दिल्ली भेजा उस समय का यह समाचार है। पांच लीटर से भी कम दूध 1 दिन में। आज यह औसत बढ़कर करीब 8 लीटर हो गया है, पूरे देश में एवरेज 8 लीटर। भारत में दूध उत्पादन की उत्पादकता बढ़ने की गति दुनिया में सबसे तेज है। दूध उत्पादन में भारत दुनिया में नंबर वन है। इसका लाभ गांवों को मिला, किसान परिवारों की कमाई बढ़ी है।
हम चाहते हैं कि पशुपालक की दूध के साथ गोबर से भी कमाई बढ़े। गोबर और खेती के अवशेषों से बायोगैस, बायो-CNG और जैविक खाद बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इसमें बनास डेयरी जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज यहां दो बायो-CNG प्लांट का शिलान्यास भी हुआ है। हमारा लक्ष्य साफ है- पशु स्वस्थ हों, दूध उत्पादन बढ़े और गोबर का भी पूरा उपयोग हो। हम पशुपालन को केवल परंपरा नहीं, बल्कि किसान की आमदनी बढ़ाने और गांवों को समृद्ध बनाने का मजबूत साधन बना रहे हैं। अभी सारी बहनों से मैं बात कर रहा था, तब बहनों ने कहा हम 2 करोड़ रूपये का दूध भरते हैं। 2 करोड़ रूपये का दूध और मैंने पूछा कितना पढ़ी है? बोले, 4 किताब, और 2 करोड़ रूपये का दूध।
बीते वर्षों में हमने गांव की समृद्धि के लिए होलिस्टिक अप्रोच से संपूर्णता में काम किया है। आप मछली पालन का ही क्षेत्र देखिए, कितना विस्तार हुआ है। आपको सुनकर अच्छा लगेगा कि भारत का सी-फूड, सी-फूड निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है। समुद्र में हमारे सागर खेडू जाते हैं और मच्छी और झिंगा पकड़ते हैं, और बेचते हैं। आज खूब बड़ी छलांग लगाई है, दुनिया के देशों में उसकी मांग बढ़ी है। मछली पालन के क्षेत्र में सहकारिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
एक और क्षेत्र है, जिससे हमारे किसानों को आय का एक और साधन मिला है। ये क्षेत्र, मधुमक्खी पालन का है। बीते 12 वर्षों में शहद का उत्पादन दोगुना हुआ है। और मुझे याद है कि मैं बनासकांठा में आया, तब आप सबको आह्वान किया था कि हमें स्वीट रिवॉल्युशन करना है, मधुर क्रांति करनी है, और आज बनासकांठा मधु, मधु उत्पादन में नए रिकॉर्ड बनाने लगा है। आज बहनों को मिला, तब उन्होंने कहा हम 35 लाख का मध बेचते है। आपको जानकर गर्व होगा कि हमारा देश प्राकृतिक शहद का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है, और ये जो मधु क्रांति आई है, स्वीट रिवॉल्युशन आया है, इसमें हमारी बहनों के सेल्फ हेल्प ग्रुप्स का योगदान भी बढ़ता जा रहा है।
कुछ दिन पहले ही 7 अक्टूबर को मुझे सरकार के मुखिया के रूप में सेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे हुए हैं। ऐसा लगता है कि कल की ही बात है, ओ हो-हो यह तो कल की ही तो बात है। जब 7 अक्टूबर 2001 को मैंने पहली बार शपथ ली थी, आपने, अपने नरेंद्र भाई को बहुत सारा प्यार दिया है, खूब प्रेम दिया आपने मुझे। आज मुझे यहां थोड़ा अटपटा सा लग रहा था, देशभर में जो चल रहा, वो चलेगा, पर यहाँ हमारे शंकरभाई ने कहा कि प्रधानमंत्री साहब, प्रधानमंत्री साहब, आप ही बताये मेरे गले के नीचे यह संबोधन उतरेगा क्या? हमें तो आदत है कि हमारे नरेंद्र भाई, कौन आया है भई, हमारे नरेन्द्र भाई। अच्छा लगे कि न लगे, ऐसा बोलने में? अरे, प्राधनमंत्री और साहब उसमें क्या मज़ा आयेगा। और मुझे भी जब गुजरात के मेरे भाई ऐसा कहे कि हमारे नरेंद्र भाई तब मेरी छाती गदगद होती है। और प्यार से भी ज्यादा, एक-एक गुजराती ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है, सही रास्ते पर जाने का मुझे मार्गदर्शन किया, प्रेरणा दी है। तब, सरकारी दफ्तर, सरकार, फाइलों के बारे में कुछ नहीं जानता था। एक सामान्य परिवार से निकला व्यक्ति, जिसकी पीढ़ियों ने कभी गाँव का प्रधान बनने का सपना तक नहीं देखा था, उसको आपने इस लायक समझा। पहले गुजरात की और फिर देश की सेवा की जिम्मेदारी दी। अभी मैं बहनों के साथ बात कर रहा था, तब उन्होंने प्रश्न पूछा कि आपको ऐसे विचार कैसे आए ज्योति ग्राम, पानी लाए, प्राकृतिक खेती, पशुओं के लिए ये सब किया? यह सब कैसे लेकर आए? कैसे आए यह विचार? मैंने कहा इसमें कोई नया गणित नहीं है, आप सबने सिखाया और मैंने वहाँ जाकर किया।
मैं सिर्फ, दो ही बातें जानता था – जनसेवा से राष्ट्रसेवा और गुजरात के विकास से देश का विकास। बाकी, कैसे करना है, कैसे आगे बढ़ना है, ये आपने मुझे सिखाया है। मैं देश के लिए जो कुछ भी कर पाया, इसका यश सभी देशवासियों को है, आप सबको भी है। इसके लिए मैं आपका जीवन भर ऋणी रहूँगा, मैं जीवनभर आपका कर्जदार रहूँगा। और जीवन के अंतिम क्षण तक आपकी सेवा में ही जुटा रहूंगा। अंतिम साँस तक सेवा-सेवा-सेवा, देशवासियों की सेवा, आप सबकी सेवा।
