नई दिल्ली; 31 अक्टूबर, 2026: लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह; केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जे. पी. नड्डा; केन्द्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू; राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री मल्लिकार्जुन खड़गे; राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश; श्री नितिन नवीन और श्रीमती सोनिया गांधी सहित संसद सदस्यों; पूर्व सांसदों तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
लोकसभा के महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह और राज्यसभा के महासचिव श्री पी. सी. मोदी के साथ-साथ लोकसभा एवं राज्यसभा सचिवालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी गणमान्य व्यक्तियों के साथ शामिल होकर सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर, विभिन्न कॉलेजों और स्कूलों के युवा छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, श्री बिरला ने युवाओं से लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेने तथा भारत की राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को सुदृढ़ करने और एक विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए अपनी क्षमताओं, नवाचार और सामूहिक प्रयासों को समर्पित करने का आह्वान किया।
श्री बिरला ने कहा कि आधुनिक भारत की राष्ट्रीय एकता के शिल्पकार सरदार पटेल का जीवन दृढ़ संकल्प, असाधारण संगठनात्मक कौशल, दूरदर्शिता और निर्णायक नेतृत्व का उदाहरण था। राष्ट्रीय एकीकरण में सरदार पटेल के उल्लेखनीय योगदान को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद अनेक चुनौतियों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, राष्ट्र के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें लगभग 560 रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराने में सक्षम बनाया। आज हम भारत की जिस एकता और अखंडता को देखते हैं, उसका श्रेय काफी हद तक उनके नेतृत्व और दूरदर्शिता को जाता है। उन्होंने सरदार पटेल की संवाद स्थापित करने, आवश्यकता पड़ने पर दृढ़ निर्णय लेने और एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता पर भी प्रकाश डाला।
केंद्रीय कक्ष में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए, श्री बिरला ने उनकी विचारशीलता, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और नवाचार की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और दृष्टिकोणों की विविधता भारत के लोकतंत्र की अंतर्निहित शक्ति को दर्शाती है। संस्कृतियों, भाषाओं, राजनीतिक व्यवस्थाओं और विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय एकता और देश के व्यापक हितों के प्रति प्रतिबद्धता समान और सर्वोपरि रहनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संविधान सदन की भारत की राष्ट्रीय यात्रा में विशेष महत्ता है। यह स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण का साक्षी रहा है। यह देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास तथा नए भारत के निर्माण से संबंधित विचार-विमर्श और निर्णयों का भी केंद्र रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस ऐतिहासिक संस्थान से प्राप्त विचारों, विजन और प्रेरणा को अपने साथ लेकर युवा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सार्थक योगदान देंगे।
राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए, श्री बिरला ने कहा कि जहां महान विभूतियों ने अपने बलिदान और योगदान से देश को स्वतंत्रता दिलाई और नए भारत की नींव रखी, वहीं अब राष्ट्र को आगे ले जाने की जिम्मेदारी युवाओं की है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शक्ति, प्रचुर ज्ञान, संसाधनों, आत्मविश्वास और नवाचार की क्षमताओं से परिपूर्ण भारत की युवा पीढ़ी के पास विभिन्न क्षेत्रों में सार्थक योगदान देने के अपार अवसर हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से अपनी रचनात्मकता, आध्यात्मिकता, वैज्ञानिक विजन और तकनीकी क्षमताओं को राष्ट्र की सेवा में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि हरेक क्षेत्र में कार्यरत युवाओं के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए तथा देश के नेतृत्व और युवाओं के सामूहिक प्रयास विश्व का नेतृत्व करने वाले भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
युवा प्रतिभागियों द्वारा साझा किए गए विचारों से देशभर के युवाओं को नई ऊर्जा, दिशा, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ प्रेरणा मिलने की आशा व्यक्त करते हुए, श्री बिरला ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी को सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदृष्टि, कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास जैसे गुणों को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये गुण भारत को वैश्विक स्तर पर परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरने तथा विश्व के समक्ष उपस्थित चुनौतियों के समाधान में योगदान देने में सक्षम बनाएंगे।
इससे पहले, दिन में श्री बिरला ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने संदेश में कहा था, "भारत के लौह पुरुष और भारत रत्न से सम्मानित सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती पर, मैं उस महान दूरदर्शी नेता को हृदय से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, जिनके दृढ़ संकल्प एवं असाधारण नेतृत्व ने हमारे राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता को नई दिशा प्रदान की।"
स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने से लेकर स्वतंत्र भारत की नियति को आकार देने तक, राष्ट्र के प्रति सरदार पटेल जी का योगदान अद्वितीय और अविस्मरणीय है। स्वतंत्र भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उन्होंने 562 से अधिक रियासतों के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाकर नवस्वतंत्र राष्ट्र के समक्ष उपस्थित सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का सफलतापूर्वक समाधान किया। उनके असाधारण नेतृत्व और राजनीतिक दूरदर्शिता ने एक सशक्त एवं एकीकृत भारत की नींव को मजबूत किया।
सरदार पटेल जी का विजन स्वतंत्रता प्राप्ति तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उनका सपना एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संगठित राष्ट्र का निर्माण करना था, जहां विविधता हमारी शक्ति और राष्ट्रीय एकता हमारी विशिष्ट पहचान हो। उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाना हमें अपने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है। आइए, हम उनके आदर्शों से प्रेरणा लें और एक सशक्त, सौहार्दपूर्ण एवं विकसित भारत के निर्माण में पूरे समर्पण के साथ योगदान देने का संकल्प लें।"
भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को अपने दृढ़ संकल्प एवं अद्वितीय नेतृत्व से नई दिशा देने वाले लौह पुरुष, भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। स्वाधीनता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने से लेकर स्वतंत्र भारत के निर्माण तक, सरदार पटेल जी का योगदान राष्ट्र के इतिहास में अद्वितीय और अविस्मरणीय है। देश के प्रथम उप-प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के रूप में उन्होंने स्वतंत्र भारत के समक्ष खड़ी कठिन चुनौती का समाधान करते हुए 562 से अधिक रियासतों के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके असाधारण नेतृत्व, राजनीतिक दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति ने एक अखंड एवं सशक्त भारत की नींव को मजबूत किया। सरदार पटेल जी का सपना केवल स्वतंत्र भारत का निर्माण नहीं, बल्कि एक ऐसे सशक्त, आत्मनिर्भर और संगठित राष्ट्र का निर्माण था, जहाँ विविधता हमारी शक्ति बने और राष्ट्रीय एकता हमारी पहचान। उनकी जयंती पर मनाया जा रहा 'राष्ट्रीय एकता दिवस' हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्वों का पुनः स्मरण कराता है। आइए, हम सभी उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, समरस और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लें। #NationalUnityDay #SardarVallabhbhaiPatel
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