नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ललित कला अकादमी के पुरस्कार समारोह में भाग लिया। संस्कृति मंत्रालय के अधीन अकादमी की 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी और तीसरे प्रिंट द्विवार्षिक इंडिया 2026 के चयनित कलाकारों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल, वरिष्ठ अधिकारी और कला जगत के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
समारोह का केंद्र समकालीन दृश्य कलाओं में उल्लेखनीय काम करने वाले कलाकार और देश की विविध कला परंपराएं थीं। 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी तथा तीसरे प्रिंट द्विवार्षिक इंडिया 2026 के पुरस्कारों ने उनके योगदान को राष्ट्रीय मान्यता दी।
शेखावत ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए उन्हें गोंड चित्रकला भेंट की। यह भेंट देश की स्वदेशी कलात्मक परंपराओं से जुड़ी थी। कार्यक्रम में दिखाई गई विशेष फिल्म में अकादमी की यात्रा और 1955 से राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के विकास का परिचय दिया गया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कला को भारत के सांस्कृतिक और सभ्यतागत अनुभवों की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने देश की विविध कला विरासत और परंपरागत कृतियों को संरक्षित रखने पर जोर दिया। प्रिंटमेकिंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने मुद्रण कला को रचनात्मक अभिव्यक्ति की महत्वपूर्ण परंपरा कहा।
मुर्मु ने कहा कि प्रदर्शनियां और हर दो वर्ष में आयोजित होने वाले प्रिंट बिएनेल कलाकारों को संवाद और विचार साझा करने के अवसर देते हैं। उन्होंने कलाकृतियों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने तथा कलाकारों को रचनात्मक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।
शेखावत ने ललित कला अकादमी को कलाकारों के लिए राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने पर बधाई दी। उन्होंने बताया कि कला की हर कृति उसके रचयिता की कल्पना और व्यक्तिगत दृष्टि सामने लाती है। उनके अनुसार अभिव्यक्ति के अलग-अलग रूप कला जगत को समृद्ध करते हैं और भारत की सृजनात्मक परंपरा की जीवंतता बढ़ाते हैं।
मंत्री ने प्रिंट बिएनेल के उद्घाटन पर मुद्रण कला की प्रक्रियाएं देखने का अनुभव साझा किया। उन्होंने इसे तकनीकी कौशल और कलात्मक प्रयोग का संगम बताया। राष्ट्रीय प्रदर्शनी तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रण कला के ऐसे आयोजन कलाकारों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाते हैं और भारतीय कला को वैश्विक दर्शकों से जोड़ते हैं।
विकसित भारत @ 2047 के संदर्भ में शेखावत ने विकास यात्रा में सांस्कृतिक समृद्धि और भारतीय रचनात्मकता की भूमिका बताई। कार्यक्रम में कलाकृतियों की बिक्री का प्रावधान कलाकारों की आजीविका और नए अवसरों से जोड़ा गया है। उन्होंने इसे रचनात्मक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला कदम कहा।
संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने अकादमी की 1954 में स्थापना से अब तक की प्रगति का विवरण दिया। राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी की शुरुआत जयपुर हाउस में 1955 में हुई थी। उस शुरुआती आयोजन के लिए करीब 1,200 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं।
इस बार 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,495 कलाकारों की 6,175 कृतियां प्राप्त हुईं। प्रदर्शनी के लिए 270 कृतियां चुनी गईं और 20 कलाकार पुरस्कार के लिए चयनित हुए।
अग्रवाल ने प्रिंट बिएनेल को प्रयोग और मुद्रण कला को बढ़ावा देने वाला मंच बताया। इससे भारतीय और विदेशी कलाकारों के बीच बातचीत संभव होती है। उन्होंने कहा कि अकादमी उभरती प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, कला से जनसंपर्क बढ़ाने और कलाकारों की पहुंच अधिक दर्शकों तक ले जाने पर काम कर रही है।
संस्कृति मंत्रालय की योजना दिल्ली के स्मारकों और धरोहर स्थलों पर इंडिया बिएनेल 2026 आयोजित करने की है। यह आयोजन 4 दिसंबर 2026 से 21 मार्च 2027 तक चलेगा। ऐतिहासिक स्थलों पर समकालीन कला के प्रदर्शन से सांस्कृतिक विरासत और वर्तमान सृजनशीलता के बीच संवाद स्थापित किया जाएगा।
प्रस्तावित बिएनेल कलाकारों को कृतियां प्रदर्शित करने और नए रचनात्मक संबंध बनाने का अवसर देगा। साथ ही आम लोगों को कला और धरोहर से जुड़ने के अधिक रास्ते मिलेंगे।
पुरस्कार समारोह में परंपरागत कला के संरक्षण और समकालीन प्रयोग, दोनों को महत्व दिया गया। कलाकारों की पहचान, आजीविका और व्यापक सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था से उनके संबंध को मजबूत करने की जरूरत भी कार्यक्रम के प्रमुख संदेशों में शामिल रही।
सम्मानित कलाकारों का विवरण
आधिकारिक सूचना: संस्कृति मंत्रालय।
