प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत का एक सुभाषित साझा करके सफलता के बाद भी विनम्र रहने का संदेश दिया है। इसमें उपलब्धियों को अंतिम पड़ाव मानने के बजाय लगातार सीखने और अपने विकास की यात्रा जारी रखने का विचार व्यक्त किया गया है।
एक्स पर साझा सुभाषित के शब्द हैं:
“खद्योतो द्योतते तावद् यावन्नोदयते शशी।
उदिते तु सहस्रांशौ न खद्योतो न चन्द्रमाः।।”
सुभाषित में जुगनू, चंद्रमा और सूर्य के प्रकाश का उदाहरण है। चंद्रमा आने तक जुगनू की चमक प्रमुख दिखती है, लेकिन सूर्य निकलने पर चंद्रमा का प्रकाश भी दिखाई नहीं देता। इसी तरह हर उपलब्धि से आगे बड़ी संभावनाएं मौजूद रहती हैं। संदेश यह है कि छोटी सफलता से अहंकार पैदा न हो; व्यक्ति विनम्रता के साथ नया ज्ञान ग्रहण करे और आगे बढ़ने का प्रयास बनाए रखे।
प्रधानमंत्री के मूल संदेश में यही संस्कृत सुभाषित और उससे जुड़ा लिंक दिया गया है: https://t.co/86NrPIbyXO
आधिकारिक सूचना: प्रधानमंत्री कार्यालय।
