राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नौ केंद्रीय मंत्रालयों, मुख्य सचिवों/प्रशासकों, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के पुलिस महानिदेशकों को 'महिला कैदियों और उनके बच्चों के मानवाधिकारों के संरक्षण' पर एक परामर्श जारी किया है।
एनएचआरसी इस बात पर ज़ोर देता है कि कैदियों के अधिकारों और ज़रूरतों, जिनमें महिला कैदी और उनके बच्चे शामिल हैं और यह सबसे अधिक संवेदनशील समूह हैं। इन पर विशेष ध्यान देने और लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। हिरासत संबंधी सुरक्षा उपायों के अलावा यह मानवीय जेल स्थितियों, पर्याप्त मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, न्याय तक पहुंच, पारिवारिक संबंधों के संरक्षण, बच्चों के सर्वोत्तम हितों की सुरक्षा, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण के लिए सार्थक अवसरों की मांग करता है।
इस परामर्श में कार्रवाई के लिए दस व्यापक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें प्रवेश पूर्व प्रक्रिया, गिरफ्तारी और कारागार प्रणाली में प्रवेश, प्रवेश रिकॉर्ड, बाल डेटाबेस और दस्तावेज़ीकरण, स्वास्थ्य, चिकित्सा देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, महिला कैदी: रहने की स्थिति, स्वच्छता, कल्याण और संवेदीकरण, कैदियों के साथ रहने वाले या उनसे अलग रहने वाले बच्चे, संचार, मुलाक़ात और परिवार से संपर्क, कारागार प्रशासन, कानूनी सहायता और न्याय तक पहुंच, महिला कैदियों की अदालत में पेशी के दौरान विशेष सुविधाएं और कल्याणकारी उपाय, पुनर्वास, रिहाई के बाद और सामाजिक पुनर्एकीकरण तथा विदेशी नागरिक कैदी शामिल हैं। विस्तृत सलाह https://nhrc.nic.in/flipbook/other_advisories/46 पर देखी जा सकती है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सभी संबंधित अधिकारियों से आग्रह करता है कि वे परामर्श में दी गई सिफारिशों को लागू करें और दो महीने के भीतर एक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करें ताकि उसे प्रगति की जानकारी मिलती रहे।
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