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कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय Read in English

‘मानव जीवन और कृषि भूमि दोनों को बचाएं’: केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने करनाल के तरावड़ी से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया

Key details of this update
DetailInformation
Date22 October 2026 (Thursday)
Time8:48 PM
Topic / Ministryकृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
Languageहिन्दी · Read in English
Reading time8 min (1,599 words)

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज हरियाणा के करनाल जिले के ऐतिहासिक कस्बे तरावड़ी से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की औपचारिक शुरुआत की। देश भर के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और कृषि संस्थानों से वर्चुअल माध्यम से जुड़े लाखों किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने आगाह किया कि यदि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के असंतुलित उपयोग को नियंत्रित नहीं किया गया, तो एक समय ऐसा आ सकता है जब धरती फसलें उगाने से इनकार कर देगी और मानव शरीर बीमारियों का घर बन जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक देश भर के हर गांव में एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया। ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में उन्होंने हरियाणा में गरीब परिवारों के लिए एक बड़े लाभ की भी घोषणा की। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा को 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' के तहत 28,422 पक्के मकानों के निर्माण के लिए 1,343.06 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का स्वीकृति पत्र सौंपा।

हरियाणा के किसानों ने पूरे देश को दिखाई प्रगति की दिशा

तरावड़ी की ऐतिहासिक भूमि पर आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हरियाणा के किसान अपनी कड़ी मेहनत, लगन और नए तरीकों को अपनाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के प्रगतिशील किसान न केवल अपने राज्य में, बल्कि मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी कृषि में बदलाव का एक नया अध्याय लिख रहे हैं, जहां वे आधुनिक और प्राकृतिक खेती के तरीकों को बढ़ावा दे रहे हैं। देश भर में कृषि प्रगति पर हरियाणा के प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि जब हरियाणा ने रास्ता दिखाया तो पूरा देश उसी दिशा में आगे बढ़ा। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी धरती माता के बिगड़ते स्वास्थ्य और देश की कृषि भूमि की स्थिति में सुधार लाने की आवश्यकता को लेकर बहुत चिंतित हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हरियाणा को बड़ा लाभ

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में श्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में पात्र गरीब परिवारों के लिए 28,422 पक्के मकानों के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। इस उद्देश्य के लिए 1,343 करोड़ रुपये और 6 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। श्री चौहान ने मंच पर मौजूद हरियाणा के कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्री श्याम सिंह राणा को इस महत्वपूर्ण आवंटन के लिए औपचारिक स्वीकृति पत्र सौंपा। इस मंजूरी से राज्य के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपना पक्का घर होने का सपना पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

किफायती उर्वरकों का मतलब अंधाधुंध उपयोग नहीं है, सरकार सब्सिडी का भार उठा रही है

उर्वरक की कीमतों और किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतें बढ़ने के बावजूद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े। सरकार उर्वरक पर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की भारी सब्सिडी दे रही थी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को यूरिया का एक बैग मात्र 266 रुपये में और डीएपी का एक बैग 1,350 रुपये में मिलता रहे। हालांकि, उन्होंने किसानों को आगाह किया कि सस्ती खाद मिलने का मतलब उसका जरूरत से अधिक उपयोग करना सही है। उन्होंने कहा कि सस्ती कीमतों पर खाद मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हम अपने खेतों में यूरिया के चार-चार बोरे डालते रहें। यह एक गलत धारणा है कि अधिक खाद डालने से फसल ज्यादा होगी। बिना जरूरत के खाद डालना अपनी मेहनत की कमाई बर्बाद करने और मिट्टी को जहरीला बनाने जैसा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बिना बीमार हुए दवाइयां लेने से कोई व्यक्ति बीमार पड़ सकता है, उसी तरह उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से हमारी धरती माता का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत अब हरित अमोनिया के उपयोग की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में देश को उर्वरक उत्पादन के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

कीटनाशक मानव शरीर को बीमारियों का गढ़ बना रहे हैं; लोगों और खेतों दोनों की सुरक्षा की जानी चाहिए

रासायनिक गहन खेती के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डालते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहरीले कीटनाशकों और उर्वरकों के अत्यधिक व अनियंत्रित इस्तेमाल से पैदा होने वाला भोजन खाने से मानव शरीर गंभीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवित रहने के लिए हवा, पानी और भोजन आवश्यक हैं। प्राचीन ग्रंथों में भोजन को 'ब्रह्म' या दिव्य माना गया है। उन्होंने आगाह किया कि अगर भोजन ही अशुद्ध हो जाए, तो मानव सभ्यता के अस्तित्व पर ही खतरा आ सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा प्रयास केवल मिट्टी को बचाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि कृषि भूमि और मानव जीवन, दोनों की रक्षा करने का एक पवित्र मिशन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेतों के स्वास्थ्य की रक्षा करना, उन पर निर्भर लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करने से अलग नहीं है।

मृदा संरक्षण के लिए तीन व्यावहारिक सिद्धांत

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने तीन प्रमुख उपायों के बारे में बताया, जिन्हें अपनाकर किसान मिट्टी की उर्वरता को बचा सकते हैं और कृषि भूमि की उत्पादकता बनाए रख सकते हैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक का उपयोग : किसानों को अपने मोबाइल फोन पर अपने 'सॉइल हेल्थ कार्ड' (मृदा स्वास्थ्य कार्ड) की जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि उनकी मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है। इसके बाद उन्हें अंधाधुंध खाद डालने के बजाय केवल आवश्यक खाद का ही संतुलित मात्रा में उपयोग करना चाहिए, ताकि उन कमियों को दूर किया जा सके।

फसल चक्र के माध्यम से फसल क्रम में बदलाव: बार-बार धान और उसके बाद गेहूं उगाने के बजाय किसानों को अपनी फसल चक्र में चना, मसूर और अरहर जैसी दालों को शामिल करना चाहिए। दाल वाली फसलों की जड़ें प्राकृतिक रूप से मिट्टी में नाइट्रोजन को स्थिर करती हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पोषक तत्वों की भरपाई होती है।

कम से कम आधे एकड़ में प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए: किसानों को शुरुआत में ही अपनी पूरी ज़मीन को प्राकृतिक खेती में बदलने की जरूरत नहीं है। अगर उनके पास पांच एकड़ भूमि है, तो उन्हें कम से कम आधे एकड़ में प्राकृतिक खेती अपनाकर शुरुआत करनी चाहिए। वे गाय के गोबर, गोमूत्र और पेड़ों के नीचे से इकट्ठा की गई मिट्टी का उपयोग करके बीजामृत और घन जीवामृत तैयार कर सकते हैं। इससे घरेलू उपभोग के लिए रसायन-मुक्त भोजन मिलेगा, खेती की लागत कम होगी और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा। दो से तीन वर्षों में, मिट्टी की स्थिति में सुधार आएगा और उत्पादन उस स्तर तक पहुंच सकता है जो पारंपरिक खेती से प्राप्त होता है।

फसल अवशेष प्रबंधन और केंचुओं का संरक्षण, जो मिट्टी के प्राकृतिक सहयोगी हैं

तरावड़ी के किसानों द्वारा फसल अवशेषों का प्रबंधन करने और अपनी मिट्टी में जैविक कार्बन का उच्च स्तर बनाए रखने के प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि फसल अवशेषों को जलाना एक आत्म-विनाशकारी प्रथा है। उन्होंने बताया कि खेतों में आग लगाने से न केवल वायु प्रदूषण होता है, बल्कि मिट्टी की ऊपरी और निचली परतों में रहने वाले खरबों सूक्ष्मजीव भी नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही वे लाभदायक कीड़े और केंचुए भी खत्म हो जाते हैं, जो प्राकृतिक खाद बनाने में मदद करते हैं। ये जीव मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि के स्वास्थ्य और उत्पादकता को बचाए रखने के लिए केंचुओं और लाभदायक कीटों का संरक्षण करना बहुत जरूरी है।

22 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक राष्ट्रव्यापी जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक, वैज्ञानिकों और अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे अपनी प्रयोगशालाओं और कार्यालयों से बाहर निकलें और 22 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक देश भर के गांवों का भ्रमण करें। उन्हें किसानों के साथ गांव-स्तर पर बैठकें और चर्चाएं आयोजित करनी चाहिए, ताकि किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य और संतुलित खेती के तरीकों के महत्व के बारे में समझाया जा सके। उन्होंने जमीनी स्तर पर इस अभियान में खुद सक्रिय रूप से जुड़े रहने का संकल्प जताया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह पहल सीधे किसानों तक पहुंचे और भारत की कृषि भूमि को बंजर होने से बचाने में मदद करे।

किसानों ने हाथ उठाकर अपने खेतों की रक्षा करने का संकल्प लिया

अपने संबोधन के समापन पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अपील पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद किसानों ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाए, मुट्ठियां बांधीं और 'भारत माता की जय' के जोरदार नारों के बीच सामूहिक संकल्प लिया। उन्होंने धरती माता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अपने खेतों में रसायनों का संतुलित उपयोग करने, फसल चक्र बदलने, फसल अवशेषों को न जलाने और धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने का संकल्प लिया।

इस ऐतिहासिक के अवसर पर आईसीएआर के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव डॉ. मांगी लाल जाट और हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) श्री विजेंद्र कुमार, कई प्रमुख कृषि वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में किसानों ने भागादी की। कार्यक्रम के दौरान गणमान्य व्यक्तियों ने 'खेत बचाओ अभियान' पर एक पुस्तिका का विमोचन भी किया।

पीके/केसी/आरटी/आरकेजे

Source: Press Information Bureau, Government of India · Read the official release

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