विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय तथा अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) की कार्यकारी परिषद की 328वीं बैठक की अध्यक्षता की।
परिषद के अध्यक्ष के रूप में डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईपीए के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों और अस्पतालों के प्रशासकों के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कर्मियों के लिए शासन और प्रशासन के क्षेत्र में भी क्षमता निर्माण पर अधिक ध्यान देने को कहा।
कार्यकारी परिषद ने लोक प्रशासन में उन्नत व्यावसायिक कार्यक्रम (एपीपीपीए) को बेहतर बनाने, इसकी विषयवस्तु को समृद्ध करने के लिए संस्थागत सहयोग बढ़ाने और प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। परिषद ने विभिन्न सरकारी क्षेत्रों और सेवाओं के प्रतिभागियों को शामिल करते हुए कार्यक्रम में अधिक विविधता लाने पर भी चर्चा की।
कार्यकारी परिषद ने संस्थान के प्रशासनिक निर्णयों में संकाय सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने और शोध परियोजनाओं से जुड़े प्रोत्साहन का भुगतान करने के प्रयासों की भी सराहना की। ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन’ योजना के लागू होने से संकाय सदस्यों को अधिक संख्या में पत्रिकाओं, शोध पत्रों, पुस्तकों, परियोजना रिपोर्टों और अन्य शैक्षणिक प्रकाशनों तक पहुंच का लाभ मिलेगा।
आईआईपीए के संरचित इंटर्नशिप कार्यक्रम की भी सराहना की गई। इसे मई 2026 में शुरू किया गया था। कार्यकारी परिषद ने इंटर्नशिप का दायरा बढ़ाने और प्रशिक्षुओं को आईआईपीए के शोध पत्रों तथा अनुसंधान कार्यों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया। संस्थान के प्रशासन को मजबूत करने के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग और महालेखा नियंत्रक से कर्मचारियों की सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों पर भी ध्यान दिया गया।
कार्यकारी परिषद ने वार्षिक पुरस्कारों की भी घोषणा की। वर्ष 2026 का पॉल एच. एप्पलबी पुरस्कार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों एस. एस. क्षत्रिय, डी. पी. तिवारी और बी. आर. शर्मा को दिया जाएगा। वहीं शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर डॉ. के. चोकलिंगम को दिया जाएगा।
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