प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज संस्कृत सुभाषितम् साझा किया जिसमें संशय से उबरने और अनिश्चितता को अंगीकार करने के महत्व पर बल दिया गया है:
न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति।
संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥
यह सुभाषितम् इस बात को रेखांकित करता है कि संदेह से मुक्त होने पर व्यक्ति शुभ संभावनाओं को पहचानने में सक्षम होता है, जबकि अनिश्चितताओं का सामना करने से गहन समझ और अंतर्दृष्टि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। यह जीवन की चुनौतियों से निपटने में विवेक, साहस और दृढ़ संकल्प के महत्त्व को भी उजागर करता है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:
न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति। संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥ https://t.co/nc2isxM6oc
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