केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया के बुसान में विश्व समुद्री दिवस के अवसर पर आयोजित उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक और दक्षिण कोरिया के समुद्री उपकरण उद्योग के साथ हुई बातचीत में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ऐसे समुद्री नियम चाहता है, जिन्हें हर देश व्यावहारिक रूप से लागू कर सके। साथ ही, भारत ऐसे साझेदारों के साथ काम करने के लिए तैयार है, जो उसके साथ मिलकर इस क्षेत्र का निर्माण और विकास करना चाहते हैं।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने विश्व समुद्री दिवस पर आयोजित सरकारी गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज, दक्षिण कोरिया के महासागर और मत्स्य पालन उपमंत्री नाम जे-हॉन, नॉर्वे की मत्स्य पालन और महासागर नीति मंत्री मारियान सिवर्टसेन नैस तथा साइप्रस की पोत परिवहन उपमंत्री मारिना हाजीमानोलिस भी मंच पर मौजूद रहे। दक्षिण कोरिया के पूर्व महासागर और मत्स्य पालन मंत्री मून सियोंग-ह्योक ने इस सत्र की अध्यक्षता की।
श्री सोनोवाल ने कहा कि भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मानक महत्वाकांक्षी और सार्वभौमिक बने रहने चाहिए, लेकिन उनके क्रियान्वयन में देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियों, विकास के स्तर, प्रौद्योगिकी और वित्त तक पहुंच में मौजूद अंतर को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत का उल्लेख किया।
सोनोवाल ने कहा, “इसलिए उद्देश्य साझा मानक और परिणाम हासिल करना होना चाहिए। इसके लिए ऐसा सहयोग जरूरी है, जो प्रत्येक सदस्य देश को इन मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाए।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भू-राजनीतिक अस्थिरता, समुद्री डकैती और लाल सागर में रूकावट जैसी चुनौतियों के बीच आईएमओ के सम्मेलन पोत परिवहन के लिए एक “मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ” की तरह हैं। ये नाविकों, व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि देशों के बीच क्रियान्वयन से जुड़ी खाई को पाटने का सबसे अच्छा तरीका व्यावहारिक साझेदारी है। इसके तहत संयुक्त कार्य समूह बनाए जा सकते हैं, जिनमें किसी सम्मेलन को लागू कर चुके देशों को उन देशों के साथ जोड़ा जाए, जो अभी अपनी क्षमता विकसित कर रहे हैं। ऐसे सहयोग के जरिए सर्वेक्षकों और निरीक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है, कानूनों का मसौदा तैयार करने में मदद की जा सकती है और समयबद्ध योजनाएं बनाई जा सकती हैं। सोनोवाल ने कहा कि इसका उद्देश्य ऐसी स्थायी राष्ट्रीय क्षमता विकसित करना होना चाहिए, जिससे देशों को लगातार दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।
उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में पहले ही ठोस कदम उठा चुका है। साल 2025 में बनाए गए पांच समुद्री कानून मार्च 2026 में लागू हो गए। भारत की समुद्री एकल खिड़की व्यवस्था में 69 बंदरगाह और टर्मिनल शामिल हैं। इसके अलावा, 115 जहाज रीसाइक्लिंग सुविधाएं हैं जो आईएमओ ढांचे के तहत हांगकांग सम्मेलन (एचकेसी) का पालन करती हैं।
सोनोवाल की कोरिया समुद्री उपकरण संघ (कोरिया मरीन इक्विपमेंट एसोसिएशन यानी कोमिया) के साथ हुई बैठक में भी यही विषय प्रमुखता से उठा। वर्ष 1980 में स्थापित यह संघ समुद्री उपकरण बनाने वाली कंपनियों, डिजाइन फर्मों, पोत निर्माताओं और मरम्मत करने वाली कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके सदस्यों में एचडी हुंडई, हनवा ओशन और सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां शामिल हैं।
केओएमईए 30 अक्टूबर को मुंबई में अपना पहला भारतीय कार्यालय खोलेगा। अप्रैल में दोनों सरकारों ने पोत निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग के लिए ‘वॉयेजेस’ ढांचे के तहत इस कदम का स्वागत किया था। फरवरी 2025 में संघ ने भारतीय पोत निर्माण कंपनियों के साथ डिजाइन, आधुनिकीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त शिक्षा कार्यक्रमों तथा समुद्री उपकरणों और कलपुर्जों के स्थानीय विनिर्माण में सहयोग की पेशकश की थी।
सोनोवाल ने कहा, “भारत में बनने वाले प्रत्येक जहाज को इंजन, प्रणोदन प्रणाली, डेक मशीनरी तथा विद्युत और नौवहन प्रणालियों की आवश्यकता होती है।” उन्होंने कहा कि फिलहाल इन उच्च मूल्य वाले उपकरणों का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है। यही स्थिति कोरियाई आपूर्तिकर्ताओं के लिए अवसर पैदा करती है।
केओएमईए के अध्यक्ष हो-इल कांग ने कहा कि संघ के सदस्य अगले दो वर्षों के भीतर भारतीय बाजार में प्रवेश करने की तैयारी शुरू कर चुके हैं। एसबी सनबो, डेयांग, कासेमेक (KASEMEC), जेओ इंजीनियरिंग सहित केओएमईए के अन्य सदस्यों ने भारत के समुद्री क्षेत्र में संभावित निवेश की अपनी योजनाओं पर चर्चा की।
सोनोवाल ने आंकड़ों के जरिए भारत में पोत निर्माण के क्षेत्र में मौजूद कारोबारी अवसरों को सामने रखा। भारत ने सितंबर 2025 में लगभग 7.8 अरब डॉलर के पोत निर्माण पैकेज को मंजूरी दी थी। योजना को मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2025 में पोत निर्माण उत्पादन में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2026 में उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई।
योजना को मंजूरी मिलने के बाद से प्रत्यक्ष सरकारी सहायता प्राप्त करने वाले जहाजों की सूची में 120 से अधिक जहाज शामिल हैं। इनका कुल मूल्य 1.27 अरब डॉलर से अधिक है। इनमें निर्यात के लिए मिले ऑर्डर कुल मूल्य के 80 प्रतिशत से अधिक हैं। सोनोवाल ने कहा, “हम पहले से ही दुनिया के लिए जहाज बना रहे हैं।” इसके अलावा, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सरकारी संस्थाओं की मांग को भी एकत्रित किया है। इससे अगले 10 वर्षों में भारतीय पोत निर्माण कंपनियों के लिए लगभग 23 अरब डॉलर मूल्य के 400 से अधिक जहाजों के ऑर्डर मिलने की संभावना का स्पष्ट आकलन उपलब्ध हुआ है।
सोनोवाल ने कहा कि मुंबई स्थित कार्यालय कोरियाई कंपनियों के लिए दीर्घकालिक मंच साबित होगा। कंपनियां संयुक्त उद्यम, लाइसेंसिंग या अपने कारखाने स्थापित करने जैसे विकल्पों के जरिए भारत में कारोबार कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय उन्हें भारत में अपना कारोबार स्थापित करने में हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री की चार दिवसीय यात्रा कल भी जारी रहेगी। इस दौरान उनकी कई अन्य बैठकें और दौरे निर्धारित हैं।
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