विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन के हॉल नंबर 5 में “ई-फाइलिंग 3.0: प्रक्रिया से व्यवहार तक” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत आयोजित इस कार्यशाला में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अधिकारी व प्रतिनिधि, उच्चतम न्यायालय की ई-समिति के सदस्य (सिस्टम्स) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को ई-फाइलिंग 3.0 प्लेटफॉर्म और इसके व्यावहारिक उपयोग से अवगत कराना था।
कार्यशाला में माननीय विधि एवं न्याय मंत्रालय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस कार्यशाला का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ, जिसके बाद राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान गाया गया।
अपने स्वागत भाषण में, सचिव (न्याय) ने विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने 'ई-फाइलिंग' को 'ई-कोर्ट चरण III' का एक प्रमुख घटक बताया, जो वादियों को देश में कहीं से भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से मुकदमे दायर करने की सुविधा देता है। उन्होंने कहा कि सरकार, न्यायिक प्रणाली में सबसे बड़े वादियों और प्रमुख हितधारकों में से एक होने के नाते, बड़ी संख्या में मुकदमों से जुड़ी होती है। उन्होंने सरकारी मुकदमों से जुड़ी प्रक्रियाओं को अदालतों की डिजिटल प्रणालियों के साथ जोड़ने के महत्व पर जोर दिया ताकि मुकदमे आसानी से दायर किए जा सकें, केस से जुड़ी जानकारी तक पहुंच आसान हो सके और अदालती दस्तावेजों का प्रबंधन सुव्यवस्थित हो सके। उन्होंने बताया कि ई-फाइलिंग, भौतिक रूप से फाइल करने की कमियों को दूर करेगी, क्योंकि इसके जरिए सरकारी अधिकारी भौगोलिक बाधाओं के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक रूप से केस दर्ज कर सकेंगे।
सचिव ने सरकारी विभागों के लिए उपलब्ध मुकदमेबाजी-प्रबंधन सुविधाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस के लिए इस्तेमाल होने वाले यूजर क्रेडेंशियल्स का उपयोग ई-कोर्ट सिंगल साइन-ऑन (एसएसओ) के लिए भी किया जा सकता है, जिसके जरिए सरकारी अधिकारी अपने केसों को ट्रैक कर सकते हैं और कार्यालय से ही ई-पे के माध्यम से शुल्क का ऑनलाइन भुगतान भी किया जा सकता है। इस दौरान ई-कोर्ट परियोजना पर एक वीडियो भी दिखाया गया।
सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के सबसे बड़ी वादी होने के बावजूद, सरकारी मंत्रालयों/विभागों में ई-फाइलिंग की व्यवस्था एक समान नहीं है। इस कार्यशाला की योजना विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के मार्गदर्शन और सहयोग से बनाई गई, ताकि अधिकारियों को जागरूक किया जा सके तथा ई-फाइलिंग के व्यापक और नियमित उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री ने कहा कि नई तकनीकों को अपनाने में अक्सर शुरुआत में झिझक होती है। डाकघर से लेकर टेलीफोन और बाद में मोबाइल फोन के विकास के माध्यम से इसे स्पष्ट करते हुए, उन्होंने तकनीकी प्रगति को अपनाने के लिए मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ई-फाइलिंग इस तकनीकी बदलाव का एक अहम हिस्सा है और यह कहीं जाने वाली नहीं है।
माननीय मंत्री ने कहा कि तकनीकी उपायों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के हितों को ध्यान में रखना और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सुलभ व कुशल बनाना होना चाहिए। न्यायिक प्रणाली में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने बताया कि अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की शुरुआत से केसों के त्वरित निपटारे में काफी मदद मिली है, जिससे समय और खर्च दोनों की काफी बचत हुई है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल उपायों ने सरकारी अधिकारियों, वकीलों और वादियों को अदालतों तक आने-जाने की आवश्यकता कम कर दिया है, जिससे न्याय मिलने की प्रक्रिया अधिक आसान और कुशल हो गई है। उन्होंने कहा कि तकनीक-आधारित समाधानों को और अधिक व्यापक रूप से अपनाने से लंबित केसों की चुनौती से निपटने और केसों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिल सकती है। मौजूदा कार्य-प्रणालियों पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं के संदर्भ में, माननीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानों की जगह नहीं ले सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा कि तकनीक को एक ऐसे सहायक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए जो मानवीय श्रम को कम करे, काम को आसान बनाए और कार्यकुशलता में सुधार करे।
यह स्वीकार करते हुए कि चुनौतियां आएंगी, माननीय मंत्री ने जीवन को आसान बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रौद्योगिकी के बारे में समझाने और हितधारकों में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
न्याय विभाग के संयुक्त सचिव (ई-कोर्ट) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। उन्होंने माननीय मंत्री, सचिव (न्याय), ई-समिति, एनआईसी तथा इसमें शामिल मंत्रालयों व विभागों का आभार व्यक्त किया। संयुक्त सचिव ने भाग लेने वाले मंत्रालयों और विभागों से आग्रह किया कि वे अपने संबंधित कर्मचारियों को जागरूक करें और मुकदमेबाजी से संबंधित कार्यों में 'ई-फाइलिंग 3.0' के व्यापक और नियमित उपयोग को बढ़ावा दें।
एनआईसी द्वारा आयोजित तकनीकी सत्रों में, व्यावहारिक प्रदर्शनों के साथ, निम्नलिखित विषयों को शामिल किया गया:
ई-कोर्ट की कार्यप्रणाली: ई-कोर्ट परियोजना की एप्लिकेशंस और सेवाओं का संक्षिप्त विवरण;
ई-कोर्ट सिंगल साइन-ऑन (एसएसओ) और ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल ऐप;
ई-फाइलिंग 3.0: फीचर्स और कार्य, जिनमें सरकारी वकीलों और सरकारी विभागों को उपलब्ध सुविधाएं शामिल हैं; और
प्रतिभागी अधिकारियों के साथ खुली चर्चा।
इस कार्यशाला में न्याय विभाग के ई-कोर्ट चरण III के तहत किए जा रहे उन प्रयासों को और बल मिला, जो संपूर्ण डिजिटल और पेपरलेस अदालतें बनाने, नागरिकों के अनुकूल न्यायिक ई-सेवाएं शुरू करने और सभी अदालतों में ई-फाइलिंग को अनिवार्य रूप से अपनाने की दिशा में जारी हैं।
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