भारतीय मानक ब्यूरो के आयुष विभाग ने आयुर्वेद, योग और सोवा-रिग्पा में एक समान गुणवत्ता मापदंड विकसित करने पर दो राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए। इन आयोजनों में 600 से अधिक शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, शिक्षकों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लेकर पारंपरिक चिकित्सा में सुरक्षा तथा वैज्ञानिक मानकों पर विचार साझा किए। इसका उद्देश्य उपभोक्ता विश्वास और अंतरराष्ट्रीय मान्यता को बढ़ाना है।
प्रगति 2026: आयुर्वेद और योग के मानकों पर राष्ट्रीय कार्यक्रम
बेलगावी में 'प्रगति 2026' का आयोजन बीआईएस ने केएलई श्री बीएमके आयुर्वेद महाविद्यालय और केएलई एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च के साथ किया। इसमें 600 प्रतिभागी शामिल रहे। वैज्ञानिक-ई तथा आयुष प्रमुख सृष्टि दीक्षित ने भारतीय मानकों के विकास और आईएसओ के साथ भारत के कार्यों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि विश्वसनीय शोध, मरीजों की सुरक्षा, नियमन और उपचार की गुणवत्ता के लिए स्पष्ट मापदंड अत्यंत आवश्यक हैं।
शिक्षा एवं अभ्यास: विशेषज्ञों ने आयुर्वेद तथा योग में समान शब्दावली, पाठ्यक्रम के मापदंड और क्लिनिकल कार्यों के लिए दिशा-निर्देशों की आवश्यकता बताई।
उद्योग और स्टार्टअप: हिमालय वेलनेस की डॉ. बिंदु इंदिरा तथा कर्नाटक आयुष ड्रग्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के डॉ. श्रीनिवास पाटिल ने बताया कि बीआईएस मानकों का पालन बाजार में प्रवेश और लोगों का भरोसा मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
संवाद सत्र: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के प्रो. काशीनाथ समागंडी और बीआईएस आयुर्वेद चयन समिति के अध्यक्ष वैद्य जयंत देवपुजारी ने शिक्षा, शोध, उत्पादन तथा उपचार केंद्रों में नियमों को लागू करने की व्यावहारिक चुनौतियों पर प्रतिनिधियों से चर्चा की।
लेह में सोवा-रिग्पा की गुणवत्ता पर विचार-विमर्श
लेह स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा में बीआईएस ने 5वीं सोवा-रिग्पा अनुभागीय समिति की बैठक के साथ मंथन सत्र आयोजित किया। पद्मश्री डॉ. पद्मा गुरमेत, डॉ. अर्जुन सिंह, डॉ. उसामा अकरम और बीआईएस के डॉ. माहे आलम ने भाग लिया। चर्चा में औषधि गुणवत्ता और पारंपरिक ज्ञान संरक्षण के उपाय उठाए गए।
दवा सुरक्षा: जड़ी-बूटियों, कच्चे औषधीय पदार्थों और तैयार फॉर्मूलेशन की गुणवत्ता, प्रभावकारिता और सुरक्षा जांच के लिए प्रयोगशाला परीक्षण, विश्लेषणात्मक मानदंड, फार्माकोपियल मानक तथा गुणवत्ता आश्वासन व्यवस्था पर जोर रहा।
पारंपरिक ज्ञान के अधिकार: प्रतिभागियों ने स्थानीय औषधीय ज्ञान के संरक्षण के लिए पेटेंट, ट्रेडमार्क और भौगोलिक संकेतों के इस्तेमाल पर विचार किया।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग, केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद और केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद जैसे राष्ट्रीय संस्थान इन पहलों से जुड़े रहे। बीआईएस ने शिक्षाविदों व उद्योग के साथ संवाद जारी रखने तथा नए मानक प्रस्ताव जमा करने के लिए सरल ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराने की जानकारी दी।
देश की राष्ट्रीय मानकीकरण संस्था बीआईएस गुणवत्ता मानक और अनुरूपता आकलन के लिए जिम्मेदार है। इसके आयुष विभाग का काम भारतीय चिकित्सा परंपराओं के लिए ऐसे निर्देश तैयार करना है जो देश और विदेश दोनों जगह भरोसेमंद गुणवत्तापूर्ण सेवाओं को समर्थन दें।
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