ताजिकिस्तान के दुशान्बे में 20 अक्टूबर 2026 को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग मजबूत करने को कहा। उन्होंने आतंकवाद को सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के लिए गंभीर चुनौती बताया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवादी हिंसा से लोगों की जान जाती है, कारोबार और निवेश प्रभावित होते हैं तथा युवाओं के अवसर सीमित हो सकते हैं। उनके अनुसार, ऐसे कृत्यों को किसी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता और आतंकी संगठनों को धन, समर्थन या आश्रय देने वालों के प्रति अलग-अलग मानदंड नहीं होने चाहिए।
उन्होंने अगस्त–सितंबर 2026 में बिश्केक के एससीओ शिखर सम्मेलन का उल्लेख किया, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा, क्षेत्रीय संपर्क तथा अवसरों पर काम करने की जरूरत रखी थी। सिंह ने कहा कि आर्थिक सहयोग परस्पर लाभ, समान संप्रभुता, सहमति और सम्मान के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने नए संस्थान बनाने के बजाय वास्तविक जरूरतों के मुताबिक दोहराव से बचने और ठोस नतीजे देने वाली व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
बदलती वैश्विक व्यापार स्थितियों, आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं तथा ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच रक्षा मंत्री ने सामूहिक निर्णयों को व्यावहारिक कार्रवाई में बदलने पर जोर दिया। उन्होंने व्यापार प्रक्रियाओं, निवेश और तकनीक के उपयोग में सहयोग का समर्थन किया। भारत ने 2026 से 2030 तक के बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना के पक्ष में अपना रुख दोहराया।
बिश्केक सम्मेलन में ताशकंद में सार्वभौमिक केंद्र और दुशान्बे में मादक पदार्थ-रोधी केंद्र को स्थायी संस्थानों के रूप में स्थापित करने के निर्णय का सिंह ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के लिए समयबद्ध काम और बेहतर समन्वय आवश्यक होगा।
सिंह ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह को क्षेत्रीय संपर्क के उदाहरणों के रूप में रखा। उनके मुताबिक इन पहलों से मध्य एशिया के देशों को दूसरे बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि संपर्क परियोजनाओं में संबंधित देशों की सहमति, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने व्यापार की लागत घटाने के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाएं सरल बनाने, कागजात के डिजिटलीकरण, परिवहन सुविधाएं बेहतर करने तथा अलग प्रणालियों के बीच तकनीकी तालमेल पर भी जोर दिया।
मंत्री ने मुंबई में मध्य एशियाई अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण पर आयोजित बैठक में भाग लेने वाले साझेदारों का आभार जताया। उन्होंने एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद के पहले आयोजन को भी याद किया।
राजनाथ सिंह के अनुसार, क्षेत्रीय सहयोग की सफलता का पैमाना युवाओं के लिए नए मौके, उद्यमियों को उपलब्ध बाजार, किसानों और छोटे व्यवसायों तक पहुंचने वाली तकनीक तथा समाजों के बीच मजबूत संपर्क होना चाहिए।
उन्होंने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को सेवा वितरण और वित्तीय समावेशन में तकनीक के उपयोग का उदाहरण बताया। स्टार्टअप क्षेत्र के विकास तथा महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी उन्होंने व्यापक प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा कहा।
सिंह ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन, मिशन लाइफ और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, जिम्मेदार उपभोग और जलवायु-अनुकूल विकास के प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी उपयोगी है।
रक्षा मंत्री ने एससीओ से पिछले 25 वर्षों के सहयोग को आगे बढ़ाते हुए साझा प्राथमिकताओं पर परिणाम देने वाली योजनाएं बनाने का आग्रह किया। उन्होंने सदस्यों को वर्ष के अंत में भारत में आयोजित होने वाले पहले एससीओ सभ्यता संवाद मंच में आमंत्रित किया।
बैठक में व्यापारिक सहयोग की प्रगति तथा परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में नई साझेदारियों की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक के बाद संयुक्त घोषणा को मंजूरी दी। इसमें 2027 का बजट, संबंधित प्रशासनिक निर्णय तथा 2026–2030 की बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्ययोजना शामिल रही।
एससीओ की शासनाध्यक्ष परिषद सदस्य देशों के बीच आर्थिक और अन्य व्यावहारिक सहयोग के लिए काम करती है। भारत 2017 से संगठन का पूर्ण सदस्य है तथा इसके विभिन्न मंचों में भाग लेता रहा है।
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