भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (उर्फ ललन सिंह) ने 3 नवंबर 2026 को सिक्किम के गंगटोक में सिक्किम मिल्क यूनियन (एसएमयू) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डेयरी से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, सहकारी नेटवर्क का विस्तार करना और डेयरी क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना था।
माननीय केन्द्रीय मंत्री ने ‘राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम’ (एनपीडीडी) के अंतर्गत सिक्किम मिल्क यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इस सुविधा का उद्देश्य माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण और गुणवत्ता मूल्यांकन को मजबूत करना है। इससे डेयरी क्षेत्र में गुणवत्ता आश्वासन और खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने डेयरी उत्पादों और सिक्किम मिल्क यूनियन की अन्य पहलों को प्रदर्शित करने वाले प्रदर्शनी स्टॉलों का निरीक्षण भी किया।
कार्यक्रम की शुरुआत सिक्किम मिल्क यूनियन के अध्यक्ष के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद माननीय केन्द्रीय मंत्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान किया गया। करफेक्टर स्थित माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया गया। पारंपरिक डेयरी उत्पाद ‘चुरपी’ की ‘ट्रेसेबिलिटी’ को मजबूत करने और इसकी पहचान तथा बाजार में पहुंच को बढ़ावा देने हेतु ‘चुरपी ट्रेसेबिलिटी’ पहल की शुरुआत की गई। माननीय केन्द्रीय मंत्री किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) द्वारा विकसित ‘फॉडर प्लस’ उत्पादों के शुभारंभ के साक्षी भी बने। इस दौरान पशुधन क्षेत्र में चारे की उपलब्धता, किसानों के सामूहिक प्रयासों और आय के विविध अवसरों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
पांच नवस्थापित डेयरी सहकारी समितियों (डीसीएस) को पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। यह सिक्किम में सहकारी डेयरी नेटवर्क को मजबूत करने तथा जमीनी स्तर तक संगठित डेयरी संस्थानों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है।
पिछले एक दशक के दौरान सिक्किम में दूध उत्पादन में 79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई
सभा को संबोधित करते हुए, माननीय केन्द्रीय मंत्री ने सिक्किम सरकार और सभी हितधारकों को डेयरी क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि दूध उत्पादन में 79 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 1.37 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 2.45 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। वहीं, डेयरी सहकारी समितियों की संख्या 2014–15 में 389 से बढ़कर 2025–26 में 733 हो गई है, जो कि 88 प्रतिशत की वृद्धि है। उपभोक्ताओं को होने वाली दैनिक दूध की आपूर्ति भी दोगुनी होकर 28,000 लीटर से 56,000 लीटर हो गई है।
डेयरी विकास में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने एनडीडीबी से अपने प्रयासों को तेज करने और अतिरिक्त मानव संसाधन तैनात करने का आग्रह किया ताकि सिक्किम को दूध के उत्पादन एवं खरीद के मामले में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सके। उन्होंने दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, मिलावट रोकने और किसानों को उचित लाभ दिलाने में डेयरी सहकारी समितियों की भूमिका को रेखांकित किया।
वाराणसी का उदाहरण देते हुए, उन्होंने बताया कि कैसे एनडीडीबी के हस्तक्षेप से दूध का संग्रह 2022 में 14,000 लीटर प्रतिदिन से बढ़कर लगभग 2.5 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। किसानों को मिलने वाली कीमत भी 28–30 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसके अलावा, ‘गोवर्धन’ पहल के तहत बायोगैस संयंत्रों में गाय के गोबर का उपयोग करके किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा हुए हैं।
स्वदेशी सिरी मवेशियों के लिए उत्कृष्टता केन्द्र
मंगन, जहां स्थानीय मवेशियों से औसतन लगभग तीन लीटर दूध प्रतिदिन मिलता है, के अपने दौरे का उल्लेख करते हुए माननीय मंत्री ने घोषणा की कि केन्द्र सरकार स्वदेशी सिरी मवेशियों के संरक्षण एवं विकास के लिए एक ‘उत्कृष्टता केन्द्र’ स्थापित करने हेतु धनराशि आवंटित करेगी। प्रस्तावित केन्द्र इस नस्ल की आनुवंशिक क्षमता और दूध उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने हेतु आईवीएफ सहित उन्नत प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देगा। उन्होंने राज्य सरकार को इस पर विचार करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा।
मंगन डेयरी संयंत्र का आधुनिकीकरण
माननीय मंत्री ने आगे कहा कि मिजोरम में कार्यान्वित किए गए सफल मॉडल का अनुसरण करते हुए एनडीडीबी मंगन जिले में मौजूद डेयरी प्रसंस्करण संयंत्र के व्यापक आधुनिकीकरण का वित्तपोषण करेगा और यह काम स्वयं पूरा कराएगा।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, उन्होंने सिक्किम के डेयरी एवं कृषि विकास के प्रति केन्द्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस राज्य की आर्थिक प्रगति पूर्वोत्तर क्षेत्र को मजबूत बनाने और ‘आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर’ के प्रधानमंत्री के विजन को आगे बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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