सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के दिल्ली हाट, आईएनए में आयोजित शिल्प समागम मेला 2026 में भारत की समृद्ध कला परंपराओं, पारंपरिक शिल्पकला और सांस्कृतिक विविधता को एक साझा मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और पारंपरिक कला रूपों के प्रदर्शन के साथ-साथ यह 15 दिवसीय मेला भारत की समावेशी भागीदारी और विविधता का जीवंत उत्सव भी बनकर उभर रहा है।
‘प्रकाश और परंपरा – ज्योति से ज्योति जलाएँ’ विषय पर आयोजित यह मेला भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प, उत्सव की रोशनी और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाता है।
इस मेले को सात अलग-अलग थीम वाले ज़ोन में बांटा गया है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र भारत की कला, शिल्प, परंपराओं, खानपान और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का अनूठा अनुभव प्रदान करता है। कला आँगन में शिल्पकारों द्वारा अपनी कला का सजीव प्रदर्शन किया जाता है; प्रकाश चौक में दीपों और रोशनी की विविध छटाएँ देखने को मिलती हैं; पूजा पथ में पूजा-पाठ से जुड़ी वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं; सजावट बाज़ार में घर की सजावट से जुड़े उत्पाद उपलब्ध हैं; घराना में वस्त्रों और फैशन से जुड़े उत्पादों को स्थान दिया गया है; स्वाद चौक में विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है; जबकि मंच पर सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है।
मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है। अब तक आयोजित 15 ऐसे मेलों के माध्यम से अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और सफाई कर्मचारियों के 1,000 से अधिक कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसरों का लाभ मिला है।
सोमवार शाम मेले का उद्घाटन करने के बाद, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने विभिन्न स्टॉलों का दौरा किया और स्टॉल संचालकों तथा आगंतुकों से बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शित उत्पादों और पारंपरिक शिल्पकलाओं में विशेष रुचि दिखाई।
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने मेले में भाग ले रहे कारीगरों से बातचीत के दौरान उनकी रचनात्मकता, हुनर और उद्यमशीलता के प्रयासों की सराहना की।
डॉ. कुमार के इस दौरे से यह भी रेखांकित हुआ कि आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे विभिन्न समुदायों के कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन, उपभोक्ताओं से जुड़ने और आजीविका के अवसरों का विस्तार करने के लिए मंच उपलब्ध कराना कितना महत्वपूर्ण है।
मेले का एक विशेष आकर्षण शाम के समय आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला है, जिनमें विभिन्न राज्यों के कलाकार और प्रस्तुतकर्ता एक मंच पर जुटकर अपनी-अपनी कला शैलियों और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक प्रस्तुत करते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों और प्रस्तुतकर्ताओं की रंगारंग प्रस्तुतियाँ आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं।
संगीत, नृत्य और अन्य कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से ये कार्यक्रम आगंतुकों को देश के विभिन्न क्षेत्रों की विविध सांस्कृतिक छटाओं का एक ही मंच पर अनुभव करने का अवसर प्रदान करते हैं।
शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों को अपनी कला और विरासत साझा करने, क्षेत्रीय पहचान को प्रदर्शित करने तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक साझा मंच प्रदान करते हैं।
ये प्रस्तुतियाँ मेले के उत्सवपूर्ण माहौल को और भी जीवंत बनाती हैं। साथ ही, भारत की पारंपरिक और समकालीन कला एवं संस्कृति की समृद्धि और विविधता को भी दर्शाती हैं।
यह मेला पारंपरिक शिल्पकला, हथकरघा उत्पादों, शिल्प के लाइव प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को एक मंच पर लाने के साथ-साथ उद्यमशीलता, आजीविका के अवसरों और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है।
मेले में 130 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई कर्मचारियों और दिव्यांगजनों से जुड़े कारीगरों एवं लाभार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और रचनात्मक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।
मेले का एक प्रमुख आकर्षण भारत ट्यूलिप (Bharat TULIP) है, जिसका उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारीगरों को व्यापक बाजारों से जोड़ना है, ताकि वे अधिक से अधिक ग्राहकों तक पहुंच सकें और अपनी आर्थिक संभावनाओं को मजबूत बना सकें। यह पहल कारीगरों को बेहतर पहचान और उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराकर भारत की पारंपरिक कला एवं शिल्पकलाओं के संरक्षण में भी योगदान देती है।
पर्पल फेस्ट के माध्यम से यह मेला दिव्यांगजनों की रचनात्मकता, क्षमताओं और योगदान को भी प्रोत्साहित करता है। इसके जरिए समाज में समान अवसरों, सक्रिय भागीदारी और समावेशिता को बढ़ावा देने का संदेश दिया जाता है।
इस मेले में भाग लेने वाले लाभार्थियों को नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी), नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसकेएफडीसी) और नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (एनडीएफडीसी) का सहयोग प्राप्त है। उनकी भागीदारी को सुगम बनाने के लिए उन्हें निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा, यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता और सामान के परिवहन जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं।
इस पहल के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने, पारंपरिक शिल्पकला को प्रोत्साहित करने, उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के अपने प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। साथ ही, यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाने का भी अवसर प्रदान करती है।
यह मेला आगंतुकों को भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प को करीब से देखने और जानने, कारीगर समुदायों को प्रोत्साहित करने और कला, शिल्पकला, संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की जीवंत सांस्कृतिक विविधता का अनुभव करने का अवसर प्रदान करता है।
शिल्प समागम मेला 2026, नई दिल्ली के दिल्ली हाट, आईएनए में 15 नवंबर, 2026 तक आगंतुकों के लिए खुला रहेगा।
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