नीति आयोग और आईआईटी (ISM) धनबाद में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की एक पहल, TEXMiN (प्रौद्योगिकी अनुवाद अनुसंधान पार्क) ने क्रिटिकल और रणनीतिक खनिज क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त आशय पत्र (SoI) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस साझेदारी का उद्देश्य स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाना, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना तथा भारत में लचीली और टिकाऊ क्रिटिकल मिनरल मूल्य श्रृंखलाओं के विकास का समर्थन करना है। यह राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के उद्देश्यों और 'आत्मनिर्भर' तथा 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
इस आशय पत्र पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास के आईआईटी (ISM) धनबाद दौरे के दौरान हस्ताक्षर किए गए, जहां उन्होंने 31 अक्टूबर 2026 को इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स के 45वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के तहत आयोजित 'क्रिटिकल मिनरल्स एंड रेयर अर्थ्स (CMRE 2026)' पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया था।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. दास ने राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भारत के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के रणनीतिक संवर्धक के रूप में क्रिटिकल मिनरल्स के महत्व को रेखांकित किया। भारत की समृद्ध धातुकर्म (मेटलर्जिकल) विरासत का हवाला देते हुए, उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के सहयोग के माध्यम से स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने केवल खनन-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर एक एकीकृत मूल्य श्रृंखला अपनाने पर जोर दिया, जिसमें अन्वेषण, प्रसंस्करण, शोधन, उन्नत सामग्री और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) शामिल हों। उन्होंने कोयले की फ्लाई ऐश, रेड मड, माइन टेलिंग्स और इलेक्ट्रॉनिक कचरे जैसे द्वितीयक संसाधनों से क्रिटिकल मिनरल्स को पुनः प्राप्त करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने अनुसंधान को व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक प्रौद्योगिकियों में बदलने और टिकाऊ संसाधन उपयोग को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया।
नीति आयोग और TEXMiN के बीच यह संयुक्त आशय पत्र चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की रूपरेखा तय करता है: सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास; तकनीकी और रणनीतिक अध्ययन; नीतिगत एवं संस्थागत समर्थन तथा क्षमता निर्माण और ज्ञान का आदान-प्रदान।
इस सहयोग का उद्देश्य स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना, प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोग को सुगम बनाना और सरकार, शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा देना है।
इस संगोष्ठी में नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, प्रौद्योगिकी डेवलपर्स और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा भारत के क्रिटिकल मिनरल्स एवं रेयर अर्थ्स इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।
इस पहल से भारत में लचीली क्रिटिकल मिनरल आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
पीके/केसी/आरटी/जेएस
