सम्मेलन के पूर्ण सत्र में ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन पर हुई चर्चाओं, तथा लोक लेखा समिति की बदलती भूमिका को ध्यान में रखते हुए, हम निम्नलिखित संकल्प लेते हैं:
• सार्वजनिक धन के वितरण की कड़ी जांच करना, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जिस सेवा या उद्देश्य के लिए धन आवंटित किया गया है, वह कानूनी रूप से उसी के लिए उपलब्ध है; इस प्रकार सरकारी खजाने की सुरक्षा करना;
• एक डिजिटल पोर्टल बनाकर संसद और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की लोक लेखा समितियों के बीच निरंतर आपसी सीखने, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और प्रक्रियात्मक नवाचारों को साझा करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना;
• सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ऑडिट पैराग्राफ और लोक लेखा समितियों की सिफारिशों पर 'कार्रवाई रिपोर्ट' जमा करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने हेतु कार्य योजना बनाना;
• सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की लोक लेखा समितियों में 'ऑडिट पैरा मॉनिटरिंग सिस्टम' जैसी डिजिटल निगरानी प्रणाली का विकास सुनिश्चित करना;
• विशेष प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण/ओरिएंटेशन आयोजित करके लोक लेखा समिति सचिवालयों की संस्थागत क्षमता को बढ़ाना, और सदस्यों को जटिल तकनीकी तथा वित्तीय मुद्दों की जांच के लिए विश्लेषणात्मक उपकरण उपलब्ध कराना;
• राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों में हर महीने कम से कम तीन बैठकें आयोजित करने और उप-समितियां गठित करने पर विचार करना, ताकि लंबित ऑडिट टिप्पणियों की जांच की जा सके और उन पर उचित निर्णय ले सके।
• नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय के साथ सहयोग को मजबूत करना, ताकि उन्नत फोरेंसिक उपकरणों का उपयोग किया जा सके और शासन के उन उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके, जिन पर तत्काल विधायी निगरानी की आवश्यकता है; और
• विधायिका की उचित प्रक्रिया की अखंडता और पवित्रता को बनाए रखते हुए डिजिटल समाधानों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना।
संसद और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों द्वारा आज, 4 नवंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम, केरल में यह संकल्प अपनाया गया।
