दिल्ली-एनसीआर से बाहर आयोजित पहला राष्ट्रीय सरस मेला, भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक पहल के रूप में आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया था। यह मेला हाल ही में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नमी घाट में संपन्न हुआ। इसमें 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की लगभग 1,500 महिला उद्यमियों और लखपति दीदियों ने भाग लिया। 600 स्टॉलों के माध्यम से अपने उत्पादों का प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने प्रतिदिन औसतन 45,000 से 50,000 आगंतुकों का स्वागत किया।
भारत की राष्ट्रपति माननीया श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने पहले राष्ट्रीय सरस मेले में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और 15 अक्टूबर, 2026 को इसका उद्घाटन किया। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर सरस स्टॉलों का भी दौरा किया और लखपति दीदियों के साथ बातचीत की। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि महिला उद्यमशीलता में उत्साहजनक वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक निर्णय लेने में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है।
एनआईआरडीपीआर और कुदुम्बश्री के सहयोग से आयोजित इस मेले में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री एस. अब्दुल नज़ीर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू तथा केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, श्री के. राममोहन नायडू और केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
पहले राष्ट्रीय सरस मेले ने ग्रामीण महिलाओं को हथकरघा, हस्तशिल्प, प्राकृतिक खाद्य उत्पादों और क्षेत्रीय व्यंजनों के प्रदर्शन के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। यह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत वर्ष 2029 तक छह करोड़ लखपति दीदियाँ बनाने के माननीय प्रधानमंत्री के विज़न को साकार करने की दिशा में भी एक कदम है। इस मिशन का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को कौशल विकास, वित्तीय सहायता, बाजार तक पहुंच और उद्यमशीलता के अवसर प्रदान करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव लाना है।
मेले पर टिप्पणी करते हुए, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार प्रौद्योगिकी तथा बेहतर विपणन व्यवस्था के माध्यम से महिलाओं की वित्तीय आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश के मॉडल, जिसमें शी मार्ट्स और स्वयं आंध्र ब्रांड जैसी पहलें शामिल हैं, का विस्तार किया जाएगा और इसे देशभर में व्यापक स्तर पर अपनाया जाएगा।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने महिलाओं से रोजगार तलाशने से आगे बढ़कर रोजगार सृजक बनने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह आयोजन केवल कई सप्ताह तक चलने वाली प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए पूरे वर्ष बाजार के अवसर उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
मेले के दौरान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भारत में चीन के राजदूत महामहिम श्री शू फेइहोंग और उनके प्रतिनिधिमंडल सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी स्टॉलों का दौरा किया, उद्यमियों से बातचीत की और ग्रामीण कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों की खरीदारी की।
मेले में कुल 12.8 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई। 50 स्टॉलों वाले सरस शक्ति फूड कोर्ट में 1.9 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री हुई। कुल बिक्री में हथकरघा और हस्तशिल्प की संयुक्त हिस्सेदारी 75 प्रतिशत रही। कुल बिक्री के मामले में सबसे अधिक बिक्री करने वाले स्टॉल ने 15.6 लाख रुपये का आंकड़ा छुआ। मेले के अंतिम दिनों में चक्रवात अर्नब ने विजयवाड़ा को प्रभावित किया, जिसके कारण 28 और 29 अक्टूबर को मेला अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। खराब मौसम और परिवहन में व्यवधान के बावजूद, राज्य प्रशासन और आयोजकों ने सुरक्षा और निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया। इसके परिणामस्वरूप, पहला राष्ट्रीय सरस मेला सम्पन्न होने तक शहर में चर्चा का विषय बना रहा और इसमें कुल 12 लाख से अधिक आगंतुक पहुंचे।
समापन समारोह का शुभारंभ एनआईआरडीपीआर के सहायक निदेशक श्री चिरंजी लाल के स्वागत संबोधन से हुआ। एनटीआर, विजयवाड़ा के जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. जी. लक्ष्मीशा और ग्रामीण विकास मंत्रालय, आंध्र प्रदेश सरकार के एसईआरपी तथा एनआईआरडीपीआर के गणमान्य व्यक्तियों ने हथकरघा, हस्तशिल्प, प्राकृतिक खाद्य उत्पादों और लाइव फूड श्रेणियों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को पुरस्कार प्रदान किए। इसके अतिरिक्त, उत्पाद की गुणवत्ता और पैकेजिंग, स्टॉल की रूपरेखा और ब्रांडिंग, ग्राहक आकर्षण, उत्पाद नवाचार, प्रदर्शन तथा सोशल मीडिया पर उपस्थिति के लिए भी पुरस्कार प्रदान किए गए। मेले के आयोजन में सहयोग देने वाले राज्य नोडल अधिकारियों, जिला समन्वयकों, जिला प्रशासन तथा एसईआरपी, एनआईआरडीपीआर और कुदुम्बश्री की टीमों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।
इन स्टॉलों ने उद्यमियों को मूल्य निर्धारण, गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाओं, पैकेजिंग और उपभोक्ताओं की पसंद को समझने के अवसर प्रदान किए। इस मेले में 10 किसान उत्पादक संगठनों और 15 क्लस्टर स्तरीय महासंघों ने भी भाग लिया। लखपति दीदी के लिए बनाए गए विशेष मंडप में 21 ग्रामीण महिला उद्यमियों और उनकी उद्यमशीलता की यात्रा को प्रदर्शित किया गया। इनमें 11 ऐसी दीदियाँ शामिल थीं, जिनका वार्षिक कारोबार 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच है। लखपति दीदी स्वयं सहायता समूहों की ऐसी महिला सदस्य होती हैं, जिनके परिवारों की स्थायी वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये होती है।
इस मेले में देशभर की लखपति दीदियों की सफलता की कहानियाँ देखने को मिलीं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी तिरुपति के लोटस स्वयं सहायता समूह की श्रीमती चंद्रकला की है, जिन्होंने वर्ष 2007 में अपने पति के निधन के बाद परिवार के लकड़ी की नक्काशी के व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाली। आज उनके उद्यम का वार्षिक कारोबार 1 करोड़ रुपये से अधिक है। इसी तरह, उत्तरी गोवा के महामाया स्वयं सहायता समूह की श्रीमती सिद्धि ने अपने व्यवसाय का विस्तार किया है। उन्हें इंस्टाग्राम के माध्यम से पारंपरिक परिधानों के लिए विदेशों से ऑर्डर मिल रहे हैं और अब उनका वार्षिक कारोबार 60 लाख रुपये से अधिक हो गया है।
दैनिक बिक्री और खरीदारों के साथ बातचीत के अलावा, शिक्षण एवं ज्ञान (लर्निंग एंड नॉलेज) मंडप में संस्थानों और कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने उद्यम विकास पर संवादात्मक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए, जिनमें दीदियों के लिए 50 से अधिक प्रशिक्षण सत्र शामिल थे। इन सत्रों में स्वयं सहायता समूहों के व्यवसायों के लिए उत्पाद प्रस्तुतीकरण, वित्त और डिजिटल साधनों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया। एनआईआरडीपीआर ने ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन और पैकेजिंग के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों के उद्यमों के लिए निर्यात विपणन से संबंधित जानकारी दी। नाबार्ड ने वित्तीय सहायता के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के उद्यमों का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किया। यूनिसेफ ने वित्तीय साक्षरता के साथ-साथ छोटे उद्यमों को शुरू करने और उनका प्रबंधन करने में एआई के उपयोग पर डिजिटल पाठ्यक्रम शुरू किए। कंप्यूटर दीदी और दीदी की दुकान जैसे उद्यमों के उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि ये साधन छोटे व्यवसायों को किस प्रकार सहयोग दे सकते हैं।
मिलन एवं संवाद (मीट एंड ग्रीट) मंडप में आयोजित 10 सुव्यवस्थित खरीदार-विक्रेता बैठकों के माध्यम से महिला उद्यमियों को कॉरपोरेट खरीद और खुदरा माध्यमों से जोड़ा गया। इन बैठकों में फैबइंडिया और एचसीएल फाउंडेशन के माई ई-हाट के प्रतिनिधिमंडल शामिल थे, जिससे प्रदर्शनी से आगे भी व्यावसायिक संबंध स्थापित करने के अवसर सृजित हुए।
समेकन (कन्वर्जेंस) मंडप में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, वस्त्र, कृषि और जनजातीय कार्य सहित केंद्र और राज्य सरकारों के 20 विभागों को एक साथ लाया गया, जिससे औपचारिक ऋण, उद्यम पंजीकरण और वैधानिक प्रमाणपत्रों तक पहुंच सुगम बनाई जा सके। डिजिटल सुविधा डेस्क के माध्यम से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दिया गया, जिसमें यूपीआई का 100 प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया गया। साथ ही, ग्रामीण उद्यमों को अतिरिक्त बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करने के लिए उन्हें सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम), फ्लिपकार्ट समर्थ और मीशो पर पंजीकृत किया गया।
सरस शक्ति फूड कोर्ट में 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 200 से अधिक महिला उद्यमियों द्वारा संचालित 50 स्टॉल लगाए गए। क्षेत्रीय खानपान परंपराओं के साथ-साथ, एआई-संचालित ग्राहक सहायक की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिसके माध्यम से आगंतुक स्कैन करके मेनू देख सकते थे, अपनी पसंद के अनुसार व्यंजनों के सुझाव प्राप्त कर सकते थे और ग्राहकों की समीक्षाएँ पढ़ सकते थे। लद्दाख, आंध्र प्रदेश, पंजाब, गोवा, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित 10 से अधिक सहभागी राज्यों के दैनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मेले के अनुभव को और समृद्ध बनाया। इन कार्यक्रमों में देशभर की शिल्प, खानपान और प्रदर्शन कलाओं की परंपराओं का संगम देखने को मिला।
आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोगी भागीदार ग्रामीण गरीबी उन्मूलन सोसाइटी (एसईआरपी) की एक प्रमुख पहल ‘उद्यमशीलता विकास एवं त्वरण कार्यक्रम (ईडीएपी)’ थी। यह कार्यक्रम मेले के साथ-साथ आयोजित किया गया, जिसमें इंडिया एसएमई फोरम ने नोडल एजेंसी की भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम में उद्यम विकास के विभिन्न चरणों को शामिल किया गया, जिनमें विशेषज्ञों से सीखना, उत्पादों को बाजार के लिए तैयार करना, डिजिटल माध्यमों से पंजीकरण, उत्पाद प्रस्तुतीकरण, उद्यम पंजीकरण और खरीदारों के साथ जुड़ाव शामिल हैं। इसमें विशेषज्ञ सत्रों में 3,489 की उपस्थिति दर्ज की गई, उत्पादों की 138 प्रत्यक्ष प्रस्तुतियाँ हुईं, 288 उद्यमियों को फोटोग्राफी और पैकेजिंग संबंधी सहायता प्रदान की गई, 452 विक्रेताओं को मीशो पर पंजीकरण संबंधी सहायता मिली और उत्पाद सूची के साथ 3,383 नए व्हाट्सऐप बिजनेस खाते शुरू किए गए। स्वयं हेल्पडेस्क के माध्यम से कुल 15,231 उद्यम पंजीकरण भी किए गए।
मेले में एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने और सतत आयोजन पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के लिए व्यावहारिक उपाय भी किए गए। 600 से अधिक स्टॉलों पर कुल 2 लाख कपड़े के थैले उपलब्ध कराए गए, जबकि प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग कम करने के लिए भाग लेने वाले कारीगरों को 2,000 पुनः उपयोग योग्य काँच या मिट्टी की बोतलें उपलब्ध कराई गईं। स्टॉलों पर बाँस/जलकुंभी से बने 800 पर्यावरण-अनुकूल कूड़ेदान भी उपलब्ध कराए गए।
कुल मिलाकर, पहले राष्ट्रीय सरस मेले ने एक ही स्थान पर बाजार तक पहुंच, उद्यम संबंधी सीख, संस्थागत सहायता और डिजिटल पहुंच के अवसर उपलब्ध कराए। इससे ग्रामीण महिला उद्यमियों को ग्राहकों के साथ संबंध स्थापित करने और मेले से परे नए अवसरों का पता लगाने में मदद मिली।
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