कोयला नियंत्रक संगठन ने खदानों के वैज्ञानिक समापन और खाली हुई भूमि के टिकाऊ नए उपयोग के लिए सहायता विकसित की है। कोयला मंत्रालय के अधीन यह प्रयास बंद खदानों को आगे उपयोगी संपत्तियों में बदलने की योजना का हिस्सा है।
सीसीओ का आंतरिक सुविकल्प उपकरण संभावित पुनरुपयोग परियोजनाओं का तुलनात्मक मूल्यांकन करता है। तकनीकी व्यवहार्यता के साथ पर्यावरण, समाज और आर्थिक पहलू इसके मानदंड हैं। विकल्पों की रैंकिंग हितधारकों को अपनी परिस्थिति के लिए उपयुक्त परियोजना चुनने में डेटा आधारित सहायता देती है।
परियोजना चुने जाने के बाद प्रिज्म मॉडल उसे लागू करने की जानकारी प्रदान करता है। इसमें अवधारणा, कार्यान्वयन के तरीके, उदाहरण, नमूना विस्तृत रिपोर्ट और निविदा दस्तावेज मिलते हैं। समान क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों की जानकारी भी उपलब्ध है, जिससे योजना को व्यावहारिक दिशा देने में मदद हो सकती है।
सुविकल्प को 26 सितंबर 2026 को स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026 मिला। डिजिटल परिचालन दक्षता और डेटा आधारित निर्णय की श्रेणी में यह सम्मान इसकी उपयोगिता तथा नवाचार की पहचान है। पुरस्कार शासन, तकनीक और जनहित में बदलाव लाने वाली पहलों की उत्कृष्टता को मान्यता देते हैं।
सुविकल्प संवाद राष्ट्रीय वेबिनार श्रृंखला के माध्यम से सीसीओ ने ज्ञान तथा क्षमता विकास पर भी काम किया। कोयला कंपनियों, सरकारी अधिकारियों, विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों और अन्य पक्षों ने खदान समापन तथा बाद के उपयोग के व्यावहारिक समाधान साझा किए।
श्रृंखला के 12 विषयगत वेबिनार में रिक्लेम, लाइव्स और सुविकल्प जैसे ढांचे शामिल थे। परियोजना प्रबंधन इकाइयों, सामुदायिक भागीदारी, पर्यटन, आजीविका तथा वित्त के विषय भी आए। परित्यक्त खदान रिक्तियों के उपयोग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिवर्तन अनुभवों पर भी चर्चा हुई।
विचार-विमर्श ने समापन को केवल नियमों के अनुपालन तक सीमित देखने के बजाय व्यापक विकास से जोड़ने पर बल दिया। पर्यावरण बहाली, स्थानीय रोजगार, समुदाय और अर्थव्यवस्था में विविधता इसके प्रमुख पहलू हैं। विशेषज्ञों के अनुभवों से कंपनियों को अपनी परियोजनाओं की योजना तथा कार्यान्वयन के लिए व्यावहारिक तरीके मिले।
उपकरण, कार्यान्वयन संसाधन और ज्ञान साझा करने की गतिविधियां बंद खदानों के उत्पादक उपयोग को समर्थन देती हैं। उद्देश्य पूर्व खनन क्षेत्रों के लिए टिकाऊ क्षेत्रीय विकास और नए अवसर तैयार करना है।
कोयला मंत्रालय की सुविकल्प पहल संबंधी जानकारी।
