केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने आज नई दिल्ली में 'रूट्स एशिया 2027' के लिए 'कर्टेन रेज़र' का अनावरण किया। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय उड्डयन कार्यक्रम की मेज़बानी करने की भारत की तैयारियों में एक अहम पड़ाव है। इस कार्यक्रम में 28 दूतावासों के प्रतिनिधियों और उड्डयन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया, जो 'रूट्स एशिया 2027' से जुड़े बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सहयोग के अवसरों को दर्शाता है।
24वां 'रूट्स एशिया' 16-18 मार्च 2027 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। इसमें एशिया और अन्य क्षेत्रों की 115 से अधिक प्रमुख एयरलाइंस, 55 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधि, हवाई अड्डे, पर्यटन प्राधिकरण और विमानन क्षेत्र के हितधारक एक जुट होंगे।
नागर विमानन मंत्री श्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने 'कर्टेन रेज़र' पट्टिका का अनावरण करते हुए 'रूट्स एशिया 2027' के लिए भारत का विज़न प्रस्तुत किया, जिसकी थीम – "भारत एविएशन राइजिंग: इनक्लुसिव ग्रोथ – कनेक्टिंग एशिया एंड बियांड" थी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न से प्रेरित यह कार्यक्रम ऐसे सही समय पर हो रहा है जब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाज़ार बनने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "रूट्स एशिया 2027 सही जगह, सही समय और सही अवसर के साथ आ रहा है! यहाँ और अधिक क्षमता, अधिक एयरलाइंस और अधिक मार्गों के लिए गुंजाइश है।"
166 से अधिक हवाई अड्डों तथा अगले दशक में 100 और हवाई अड्डे विकसित करने की योजनाओं के साथ, भारत का विमानन क्षेत्र तेज़ी से विस्तार कर रहा है। मंत्री ने 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के बढ़ते महत्व पर ज़ोर दिया, जो उभरते बाज़ारों के साथ ज़्यादा शहरों और लोगों को जोड़ सकता है। इससे एयरलाइंस, पर्यटन और आर्थिक विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने भारत के सक्रिय द्विपक्षीय विमानन संबंधों, विशेषरूप से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों और अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्रा में लगातार हो रही वृद्धि की भी चर्चा की, जिसमें यात्री संख्या की सालाना चक्रवृद्धि विकास दर 4.6% दर्ज की गई है।
मंत्री ने वैश्विक विमानन समुदाय को 'रूट्स एशिया 2027' में भाग लेने और भारत के विविध पर्यटन स्थलों और विमानन के क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को जानने-समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि टियर-2 शहरों को जोड़ने, इंटरनेशनल हब को मज़बूत करने और नए रूट विकसित करने में सभी संबंधित पक्षों के सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनसे भारत की विमानन यात्रा के अगले अध्याय में मदद मिलेगी।
