सीएक्यूएम अध्यक्ष राजेश वर्मा और दिल्ली के मुख्य सचिव ने संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ धूल प्रदूषण के उपायों की समीक्षा की। बैठक में आगामी दिनों में वायु प्रदूषण घटाने के लिए विभागों के बीच समन्वय और जमीन पर कार्रवाई मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।
आयोग ने अपने वैधानिक निर्देशों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया। नगर निगम को खास तौर पर अपने अधिकार क्षेत्र की सड़कों और खुले स्थानों में धूल कम करने के प्रयास बढ़ाने को कहा गया। निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को एजेंसियों की जिम्मेदारी बताया गया।
यह चर्चा आयोग की जारी निगरानी का हिस्सा थी। 7 अक्टूबर 2026 के नोटिस में एमसीडी और उसके सभी उपायुक्तों को 12 अक्टूबर को उपस्थित होने को कहा गया था। उनसे प्रत्येक क्षेत्र की सड़कों पर धूल और कचरा हटाने के काम का विस्तृत विवरण मांगा गया था।
डीपीसीसी को सभी एजेंसियों में बेहतर तालमेल की जिम्मेदारी दी गई। आयोग ने निर्माण तथा खुदाई से जुड़े कार्यों में धूल रोकने वाली स्क्रीन और हवा अवरोधक जैसे उपायों की कमी पर ध्यान दिलाया। खुदाई से जमा धूल को नियंत्रित करना आवश्यक बताया गया। विभागों को चिन्हित समस्याओं का तुरंत समाधान तथा उल्लंघन पर जिम्मेदार अधिकारियों, परियोजना संचालकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने को कहा गया।
वैधानिक निर्देश लागू करने में विफलता पर कार्रवाई की बात आयोग ने दोहराई। जिला मजिस्ट्रेट अपने क्षेत्रों में अनुपालन की निगरानी करेंगे। उन्हें यह सुनिश्चित करना है कि खासकर धूल नियंत्रण के निर्देश केवल कागज पर न रहकर वास्तविक स्थलों पर लागू हों।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की समीक्षा बैठक का विवरण।
