केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में "भारत में बायोइकोनॉमी अवसर: नवाचार और विकास को बढ़ावा देने में स्टार्टअप्स की भूमिका" विषय पर एक उच्च-स्तरीय गोलमेज बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का आयोजन उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने नीति आयोग और नीति फ्रंटियर टेक हब के सहयोग से किया था। इस बैठक में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और बायोफार्मा स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य भारत की बायोइकोनॉमी के विकास को तेज करने के उपायों पर चर्चा करना था।
अपने संबोधन में, श्री पीयूष गोयल ने भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं और उद्यमशीलता प्रतिभा का उपयोग करके भारत को बायोइकोनॉमी में विश्व स्तर पर अग्रणी देश (ग्लोबल लीडर) के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तेजी से मंजूरी मिलने, वित्त तक बेहतर पहुंच, साझा बुनियादी ढांचे और उद्योग, शिक्षा जगत तथा सरकार के बीच मजबूत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने गोलमेज बैठक से निकले सुझावों पर एक निश्चित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करने का भी आह्वान किया।
बैठक में चर्चाओं का मुख्य केंद्र बायोफार्मा स्टार्टअप परितंत्र को मजबूत करना था। इसके लिए नियमों को सरल बनाने, तेजी से मंजूरी देने, 'रेगुलेटरी सैंडबॉक्स' (नियंत्रित और सीमित परीक्षण वातावरण) लागू करने, 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' की सुविधा देने, वैश्विक नियमों के साथ तालमेल बिठाने और पेटेंट आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया गया।
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित 'बायोफार्मा शक्ति' के महत्व पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही, प्रयोगशालाओं, परीक्षण सुविधाओं और क्लिनिकल ट्रायल सुविधाओं जैसे साझा बुनियादी ढांचे को विकसित करने की आवश्यकता पर बात की गई, ताकि लागत कम हो सके और स्टार्टअप्स अपने नवाचारों का विस्तार कर सकें।
नीति आयोग की डिस्टिंग्विश्ड फेलो सुश्री देबजानी घोष ने एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बायोइकोनॉमी बनाने के लिए स्टार्टअप्स, उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के बीच सहयोग के महत्व को उजागर किया। नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने और वैज्ञानिक खोजों को व्यावसायिक रूप से उपयोगी उत्पादों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गोलमेज बैठक में स्वदेशी 'लाइफ साइंसेज' विनिर्माण को मजबूत करने, प्रयोगशाला उपकरणों और अभिकर्मकों के लिए कस्टम क्लीयरेंस में तेजी लाने, तथा सरकारी योजनाओं और नियामक सहायता तक पहुंच को सरल बनाने के उपायों पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया, ताकि सुसंगत नीतिगत कदम उठाए जा सकें और इस क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों का तेजी से समाधान किया जा सके।
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