केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज केरलम के कोल्लम में मां अमृतानंदमयी जी के 73वें जन्मदिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि अम्मा के सान्निध्य में आकर जीवन के सभी दायित्वों से ऊपर मनुष्य होने का अर्थ समझ में आ जाता है। उन्होंने कहा कि असंवेदनशील व्यक्ति के मन में भी यहां आकर अम्मा द्वारा किए गए सेवा कार्यों के प्रति कृतज्ञता का भाव ही आता है। विश्व सेवा दिनम के दौरान अम्मा के जन्मदिन को हम सभी मनपूर्वक मना रहे हैं क्योंकि जिन्होंने 5 दशकों से पीड़ित के आंसू पोंछने को अपनी साधना और धर्म बनाया है, उनके उत्सव भी सेवा के रूप में ही मनाए जाने चाहिएं।
श्री अमित शाह ने कहा कि व्यवस्थाएं समाज को संभालती हैं लेकिन संवेदना, जिसकी प्रतिमूर्ति अम्मा हैं, समाज को जोड़ने का काम करती है। अम्मा जैसी विभूति ही न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के करोड़ों लोगों को एक-दूसरे का दुख समझने की संवेदना औऱ ज्ञान देते हैं। विश्व के करोड़ों लोगों को अम्मा के आलिंगन ने एक बोध कराया है कि अपने दुख में वो अकेला नहीं है बल्कि अम्मा उनके साथ हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 27 सितंबर, 2015, 03 अप्रैल, 2016 और 04 जून, 2023 को अम्मा से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गृह मंत्री ने कहा कि आज विश्व सेवा दिनम के दिन ही अम्मा का आशीर्वाद मिलना उनके जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि है। 2001 में गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान अम्मा की करुणा का पहली बार परिचय हुआ जब उन्होंने वहां 1200 सुंदर घर बनाकर एक पूरा गांव ही बसा दिया। अम्मा ने वहां टाउनहॉल, शिक्षा का स्थान, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पताल जैसी सब सुविधाएं देकर अम्मा ने एक पूरा गांव बसाया। आज अम्मा के गांव के नाम से उस गांव की पहचान बन गई है।
श्री अमित शाह ने कहा कि अम्मा के लिए सेवा दिनम कभी समाप्त नहीं होता क्योंकि 365 दिन उनकी सेवा चलती रहती है। 27 सितंबर, 1953 को कोल्लम ज़िले के परायकडवु गांव के एक अभावग्रस्त परिवार में अम्मा का जन्म हुआ। किसी को नहीं पता था कि यह बच्ची करोड़ों लोगों के जीवन में से अभाव, दुख और अवसाद को दूर करने का कारण बनेगी और करोड़ों जीवों के लिए मुक्ति का रास्ता प्रशस्त करेगी।
