संस्कृति मंत्रालय ने अपने 43 संगठनों और सांस्कृतिक संस्थानों में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक देश भर में 'स्वच्छता ही सेवा' (एसएचएस) अभियान 2026 के अंतर्गत स्वच्छता, जागरूकता और जन-भागीदारी से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित कीं। इस वर्ष का विषय 'स्वच्छता में सहभाग: स्वच्छ भारत, विकसित भारत' था।
इस अभियान के तहत मंत्रालय के संगठनों और अधीनस्थ कार्यालयों ने विभिन्न प्रकार की गतिविधियां कीं, जिनमें स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (सीटीयू) का कायाकल्प, श्रमदान अभियान, जागरूकता कार्यक्रम, कचरे से कला पहल और विषयगत कला प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य कचरे का पृथक्करण, एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक में कमी, 'कम करें, पुनः उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें' (3आर) के सिद्धांतों तथा पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित था।
इन पहलों के माध्यम से, संस्कृति मंत्रालय और उसके संगठनों ने स्वच्छता के उद्देश्यों को मंत्रालय के संस्कृति और विरासत के व्यापक दायित्व के साथ जोड़ते हुए स्वच्छता, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जन-भागीदारी की संस्कृति को बढ़ावा दिया। इन गतिविधियों ने अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, कलाकारों और स्थानीय समुदायों को अधिक स्वच्छ, बेहतर और टिकाऊ सार्वजनिक स्थलों की दिशा में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अभियान की मुख्य उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:
10,000 से अधिक प्रतिभागियों के सक्रिय योगदान से 424 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (सीटीयू) की पहचान करके उनका कायाकल्प किया गया और 128 सार्वजनिक स्थानों की पहचान कर उनकी सफाई की गई।
देश भर के जोनल कल्चरल सेंटर्स, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, संगीत नाटक अकादमी और सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए 207 नुक्कड़ नाटक आयोजित किए। ये नाटक स्कूलों, कॉलेजों और अधिक भीड़-भाड़ वाले अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर किए गए।
संस्कृति मंत्रालय के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपने क्षेत्रीय मंडलों के माध्यम से विभिन्न स्मारकों और कार्यालय परिसरों में स्वच्छता अभियान चलाया। जन भागीदारी की भावना से प्रेरित होकर, एएसआई के अधिकारियों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने स्मारकों के मार्गों, लॉन और मुख्य जगहों से प्लास्टिक का कचरा, सूखी पत्तियां और बिखरा हुआ कूड़ा हटाने के लिए श्रमदान किया। चयनित स्मारकों पर वृक्षारोपण अभियान भी चलाए गए, जिनमें 300 से ज़्यादा पेड़ लगाए गए।
