भारत की नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्शाती है कि पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धताएं आर्थिक विकास में बाधक नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा की प्रेरक हैं। उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उपराष्ट्रपति ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों, सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता तथा देशभर में परिवारों, किसानों और समुदायों को सशक्त बनाने में स्वच्छ ऊर्जा की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में हासिल की गई प्रगति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन को सही साबित करती है कि पर्यावरणीय संबंधी प्रतिबद्धताएं विकास की प्रेरक हैं। इससे ऊर्जा की अधिक सुलभता, उद्योगों की लागत में कमी, रोजगार के अवसरों का सृजन और आयात पर निर्भरता में कमी सुनिश्चित हो रही है। उद्योग और शिक्षा जगत के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “वर्ष 2040 की प्रौद्योगिकियां आज की प्रयोगशालाओं और स्टार्ट-अप से विकसित होंगी।” उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता के महत्व पर बल दिया।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले एक दशक में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। उन्होंने कहा कि केवल पिछले दो वर्षों में ही इस क्षेत्र में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है।
श्री जोशी ने बताया कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 भारत में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा आयोजन है। इसमें 135 देशों के 75,000 से अधिक आगंतुकों, 32 से अधिक देशों के मंत्रियों, आठ से अधिक भागीदार देशों और यूरोपीय संघ की भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भागीदार के रूप में हिस्सा लिया। इसमें छह मुख्यमंत्री, 10 राज्यों के ऊर्जा मंत्री, 400 से अधिक प्रदर्शक, 620 से अधिक वक्ता और 113 सत्र शामिल थे। इसके अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की 9वीं सभा और हरित हाइड्रोजन पर चौथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चार दिन पहले प्रतिभागी वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के अगले चरण को आकार देने के साझा संकल्प के साथ एकत्र हुए थे। शिखर सम्मेलन के समापन पर उन्होंने इसकी उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारत ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा की विकास गाथा को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि “वाट्स नेक्स्ट” मंच ने नवप्रवर्तकों को एक साथ लाने का कार्य किया, जबकि “नेक्स्ट टेरावाट मंत्रिस्तरीय पूर्ण सत्र” में एकीकृत ऊर्जा नियोजन, सुदृढ़ अवसंरचना, ऊर्जा भंडारण और वित्तपोषण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
श्री जोशी ने कल लिए गए एक बड़े फैसले पर प्रकाश डाला। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रिड स्तरीय 92 गीगावॉट- घंटे (जीडब्ल्यूएच) की ऊर्जा भंडारण क्षमता के विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना को मंजूरी दी। इसमें 30 जीडब्ल्यूएच की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस), 60 जीडब्ल्यूएच की पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (पीएसएस) और नई प्रौद्योगिकियों के माध्यम से 2 जीडब्ल्यूएच की ऊर्जा भंडारण शामिल है।
श्री जोशी ने यह भी बताया कि भारत ने उपयोगिता-स्तरीय सौर विद्युत उत्पादन की लागत 30-35 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट घंटा (2,840-3,313 रुपये) हासिल की है, जो विश्व में सबसे कम है। नवीकरणीय ऊर्जा के कारण भारत को जीवाश्म ईंधन के आयात पर 100 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक की बचत हुई है, जो लगभग 9.46 लाख करोड़ रुपये के बराबर है।
उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2025 में भारत ने 15 गीगावॉट हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की नीलामी की, जिससे नीलाम की गई कुल क्षमता 64 गीगावॉट हो गई। ये दोनों आंकड़े विश्व में सर्वाधिक हैं। वर्ष 2023 से 2025 के बीच प्राप्त औसत टैरिफ लगभग 45 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा (4,260 रुपये) रहा, जो कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों से प्राप्त विद्युत की औसत लागत से 20 प्रतिशत कम था।
भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं को रेखांकित करते हुए श्री जाशी ने बताया कि सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 225 गीगावॉट से अधिक हो गई है, जिससे भारत विश्व में सौर मॉड्यूल का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बन गया है। उन्होंने ये भी बताया कि स्व-उपभोग के लिए विकेंद्रिकृत सौर ऊर्जा क्षमता वर्ष 2030 तक 100 गीगावॉट से अधिक हो जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि इन आंकड़ों को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की रिपोर्ट “इंडिया आरई मार्केट रिपोर्ट 2026: एनालिसिस एंड फोरकास्ट टू 2030” में भी शामिल किया गया है। इस रिपोर्ट को इस शिखर सम्मेलन के दौरान जारी किया गया।
शिखर सम्मेलन के दौरान श्री जोशी ने सहयोग और निवेश के अवसर तलाशने के लिए फ्रांस, डेनमार्क, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड तथा वैश्विक दक्षिण के कई देशों के साथ द्विपक्षीय विचार-विमर्श किया।
इस शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों के 800 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान 10 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और फ्रेमवर्क समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें एसईसीआई एमओयू भी शामिल है, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 3 लाख टन हरित मेथनॉल की आपूर्ति की सम्भावना है।
नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के साथ-साथ ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने के महत्व पर बल देते हुए श्री जोशी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि के लिए अधिक मजबूत पारेशण नेटवर्क, अधिक ऊर्जा भंडारण क्षमता और स्मार्ट ग्रिड की आवश्यकता होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि पूर्वानुमान, पूर्वानुमान-आधारित रखरखाव और ऊर्जा प्रबंधन में डिजिटलीकरण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि वर्ष 2031-32 तक एआई डेटा केंद्रों के कारण विद्युत की मांग में 26.3 गीगावॉट की अतिरिक्त वृद्धि होने की सम्भावना है। उन्होंने इस अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए योजना बनाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि इस मांग को पूरा करने में नवीकरणीय ऊर्जा की प्रमुख भूमिका होगी। उन्होंने कहा, "एआई भविष्य को शक्ति प्रदान करेगा और स्वच्छ ऊर्जा एआई को शक्ति प्रदान करेगा।"
अपने संबोधन के समापन पर श्री जोशी ने दोहराया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को बीआरईएसई 2026 में एक लक्ष्य दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उद्योग जगत में उस लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता है, निवेशकों में विश्वास है और अंतर्राष्ट्रीय भागीदार इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अजय कुमार सूद और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी उपस्थित थे। भागीदार देशों के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, निवेशकों, उद्योग जगत के अग्रणियों, ज्ञान भागीदारों, प्रदर्शकों तथा अन्य प्रतिनिधियों ने भी इस शिखर सम्मेलन भाग लिया।
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