भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण -ट्राई ने आज उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण व्यवस्था तथा उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाताओं को स्पेक्ट्रम आवंटित करने की रूपरेखा पर अपनी सिफारिशें जारी कीं।
दूरसंचार विभाग ने इससे पहले 03.07.2025 को ट्राई को अवगत कराया था कि सरकार दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 3(1)(ख) के अंतर्गत उपग्रह संचार नेटवर्क प्राधिकरण शुरू करने का प्रस्ताव कर रही है। विभाग ने ट्राई से अनुरोध किया था कि वह उपग्रह संचार नेटवर्क प्राधिकरण के लिए नियम एवं शर्तें निर्धारित करने संबंधी सिफारिशें दे जिनमें इस प्राधिकरण के अंतर्गत फीडर लिंक के साथ ही यूजर लिंक दोनों के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन का प्रावधान शामिल हो।
ट्राई ने 08.04.2026 को उपग्रह संचार नेटवर्क प्राधिकरण व्यवस्था तथा उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाताओं को स्पेक्ट्रम आवंटित करने की रूपरेखा पर एक परामर्श पत्र जारी किया इसके उत्तर में 31 हितधारकों से टिप्पणियां और 12 हितधारकों से प्रति-टिप्पणियां प्राप्त हुईं, जिन्हें ट्राई की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। इस परामर्श पत्र पर 02.07.2026 को आभासी माध्यम से एक खुली परिचर्चा भी आयोजित की गई।
परामर्श प्रक्रिया के दौरान हितधारकों से प्राप्त टिप्पणियों एवं प्रति-टिप्पणियों पर विचार करने और विश्लेषण के बाद ट्राई ने उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण व्यवस्था तथा उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाताओं को स्पेक्ट्रम आवंटित करने की रूपरेखा पर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दे दिया है।
ट्राई की सिफारिशों के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण
– दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 3(1)(ख) के अंतर्गत एक नया प्राधिकरण अर्थात् उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण आरंभ किया जाना चाहिए।
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं को पात्र सेवा प्रदाताओं को सेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क उपलब्ध कराने की अनुमति दी जा सकती है।
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं को सीधे उपयोगकर्ताओं को दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण राष्ट्रीय भूभाग के लिए होना चाहिए। इसकी अधिकतम अवधि 20 वर्ष होनी चाहिए तथा इसे अधिकतम 20 वर्ष तक नवीनीकृत करने का प्रावधान होना चाहिए।
– उपग्रह संचार नेटवर्क के माध्यम से फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस, मोबाइल सैटेलाइट सर्विस का उपयोग करते हुए उपग्रह के माध्यम से डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवाओं तथा आईएमटी स्पेक्ट्रम का उपयोग करते हुए उपग्रह के माध्यम से डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवाओं की अनुमति दी जानी चाहिए।
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाएं पात्र सेवा प्रदाताओं को सेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार से उपयुक्त उपग्रह स्पेक्ट्रम (फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस और मोबाइल सैटेलाइट सर्विस) प्राप्त कर सकती हैं और/अथवा साझेदार सेवा प्रदाताओं को आवंटित स्पेक्ट्रम का उपयोग कर सकती हैं।
– ऐसे किसी भी लाइसेंसधारी या प्राधिकृत संस्था को उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्था से सेवा प्राप्त करने के लिए पात्र होना चाहिए, जिसे उपग्रह आधारित संचार सेवाएं प्रदान करने अथवा उपग्रह नेटवर्क के माध्यम से दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराने की अनुमति मिली हो।
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं के अतिरिक्त, निम्नलिखित में से कोई भी लाइसेंस/प्राधिकरण धारित संस्था को भी ऐसी किसी प्राधिकृत संस्था या लाइसेंसधारी को सेवा प्रदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए, जिसे उपग्रह आधारित संचार सेवाएं प्रदान करने अथवा उपग्रह नेटवर्क के माध्यम से दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराने की अनुमति प्राप्त है:
(क) दूरसंचार (प्रमुख दूरसंचार सेवाओं के लिए प्राधिकरण) नियम, 2026 के अंतर्गत एकीकृत सेवा प्राधिकरण, एक्सेस सेवा प्राधिकरण ,इंटरनेट सेवा प्राधिकरण और लंबी दूरी की सेवा प्राधिकरण
(ख) एकीकृत लाइसेंस के अंतर्गत एक्सेस सेवा प्राधिकरण, इंटरनेट सेवा प्राधिकरण, राष्ट्रीय लंबी दूरी सेवा प्राधिकरण , वाणिज्यिक वीएसएटी सीयूजी सेवा प्राधिकरण और जीएमपीसीएस सेवा प्राधिकरण; तथा
(ग) अपनी तरह की विशिष्ट श्रेणी के अंतर्गत भारत में स्थापित गेटवे का उपयोग करते हुए उपग्रह आधारित सेवाओं के प्रावधान एवं संचालन के लिए लाइसेंस।
बशर्ते कि ऐसी संस्था उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत करने के लिए निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करती हो तथा उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण पर लागू तकनीकी एवं परिचालन शर्तों, सेवा विस्तार संबंधी दायित्वों और सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन करने का वचन देती हो।
2. उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं को स्पेक्ट्रम का आवंटन
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं को सरकार से निम्नलिखित स्पेक्ट्रम आवंटित कराने की अनुमति दी जानी चाहिए:
(क) फीडर लिंक के लिए फिक्सड सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम; तथा
(ख) यूजर लिंक के लिए फिक्सड सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम और/या मोबाइल सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्था को फीडर लिंक में उपयोग के लिए फिक्सड सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम का आवंटन प्रशासनिक आधार पर किया जाना चाहिए। यूजर लिंक में उपयोग के लिए फिक्सड सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम / मोबाइल सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम का प्रशासनिक आधार पर आवंटन प्राप्त करने हेतु, संबंधित संस्था को यह प्रदर्शित करना चाहिए कि स्पेक्ट्रम का उपयोग करके उसके साझेदार सेवा प्रदाता (प्रदाताओं) द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रस्तावित सेवा दूरसंचार अधिनियम, 2023 की प्रथम अनुसूची में शामिल है।
– राष्ट्रीय आवृत्ति आवंटन योजना ,2025 में निर्धारित आवंटनों के अनुरूप, उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं को निम्नलिखित आवृत्ति बैंड में स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाना चाहिए:
उपग्रहों का प्रकार
यूजर लिंक के लिए आवृत्ति बैंड
फीडर लिंक के लिए आवृत्ति बैंड
(फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस)
(भूस्थिर कक्षा के उपग्रह)
सी बैंड, केयू बैंड, केए बैंड और क्यू/वी बैंड
(गैर-भूस्थिर कक्षा के उपग्रह)
केयू बैंड, केए बैंड और क्यू/वी बैंड
(मोबाइल सैटेलाइट सर्विस)
एल बैंड और एस बैंड
फिक्सड सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम और मोबाइल सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम का आवंटन उपग्रह संचार नेटवर्क (उपग्रह संचार नेटवर्क ) प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं को अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के लिए किया जाना चाहिए। हालांकि, बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार इस अवधि को अधिकतम दो वर्ष के लिए और बढ़ा सकती है।
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं को फिक्सड सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम और मोबाइल सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए मूल्य निर्धारण सहित नियम एवं शर्तें, केंद्र सरकार द्वारा नीतिगत व्यवस्था अधिसूचित किए जाने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक लागू रहनी चाहिए। इस अवधि को अधिकतम दो वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सकता है।
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं को फिक्सड सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम और मोबाइल सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए मूल्य निर्धारण सहित नियमों एवं शर्तों में कोई भी संशोधन, नीतिगत व्यवस्था की अधिसूचना की तारीख से पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाना चाहिए। ये संशोधित नियम एवं शर्तें पहले से कार्यरत उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं सहित सभी ऐसी संस्थाओं पर लागू होनी चाहिए।
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्था को किसी भी पात्र सेवा प्राधिकृत संस्था (जिसे आगे साझेदार संस्था कहा जाएगा) के साथ स्पेक्ट्रम के उपयोग के लिए समझौता करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
1. फीडर लिंक में स्पेक्ट्रम के उपयोग के लिए साझेदार संस्था को आवंटित फिक्सड सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम; तथा
2. यूजर लिंक में स्पेक्ट्रम के उपयोग के लिए साझेदार संस्था को आवंटित फिक्सड सैटेलाइट सर्विस /मोबाइल सैटेलाइट सर्विस स्पेक्ट्रम।
यह व्यवस्था साझेदार संस्था को सेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदान करने के सीमित उद्देश्य से होनी चाहिए, जबकि संबंधित स्पेक्ट्रम के उपयोग का अधिकार साझेदार संस्था के पास ही बना रहना चाहिए।
3. मोबाइल सैटेलाइट सर्विस आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा
– भारत में एमएसएस आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवाओं की अनुमति दी जानी चाहिए। इसका तात्पर्य है कि मोबाइल सैटेलाइट सर्विस के लिए आवंटित एल-बैंड और एस-बैंड स्पेक्ट्रम का उपयोग करते हुए उपग्रह के माध्यम से सीधे डिवाइस तक संचार सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
– एक्सेस सेवा प्रदान करने के लिए प्राधिकृत संस्थाओं को एमएसएस आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं से सेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क प्राप्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
– इन सिफारिशों को स्वीकार किए जाने के बाद, केंद्र सरकार को स्मार्टफोन हैंडसेट निर्माताओं को प्रोत्साहित करना चाहिए कि वे भारत में भविष्य में बेचे जाने वाले स्मार्टफोन हैंडसेट में लागू एमएसएस बैंड को सपोर्ट करने के लिए आवश्यक मॉड्यूल शामिल करें।
4. आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा
– आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा अर्थात् आईएमटी स्पेक्ट्रम का उपयोग करते हुए उपग्रह के माध्यम से सीधे डिवाइस तक संचार सेवाएं उपलब्ध कराने की अनुमति देश में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के रेडियो विनियमों के अनुच्छेद 4.4 के प्रावधानों के तहत गैर-हस्तक्षेप और गैर-संरक्षण के आधार पर दी जानी चाहिए। इसके लिए विश्व रेडियो संचार सम्मेलन-2027 (डब्लयू आर सी-27) के परिणामों की प्रतीक्षा नहीं की जानी चाहिए।
– डब्लयू आर सी -2027 के समापन के बाद आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा के संबंध में भारत सरकार द्वारा यदि कोई निर्णय लिया जाता है, तो उसे उस चरण में आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवाओं पर लागू किया जाना चाहिए।
– एक्सेस सेवा प्रदान करने के लिए अनुमति प्राप्त तथा अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल दूरसंचार स्पेक्ट्रम- आईएमटी धारक किसी भी संस्था को किसी भी उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्था से सेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क लेकर आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा प्रदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसी प्रकार, किसी भी उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्था को एक्सेस सेवा प्रदान करने के लिए प्राधिकृत और आईएमटी स्पेक्ट्रम रखने वाली किसी भी संस्था को उपग्रह संचार नेटवर्क उपलब्ध कराने की अनुमति दी जानी चाहिए।
बशर्ते कि आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा प्रदान करने की अनुमति तभी दी जाए, जब एक्सेस सेवा प्रदान करने के लिए प्राधिकृत एक या अधिक संस्थाएं, जिनके पास सामूहिक रूप से देश के सभी 22 लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्रों में संबंधित आईएमटी फ्रीक्वेंसी चैनल का आवंटन हो, उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्था को अपने आईएमटी फ्रीक्वेंसी चैनल के उपयोग की अनुमति देने पर सहमत हों। यह अनुमति केवल ऐसी संस्था (संस्थाओं) को उपग्रह संचार नेटवर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी जाएगी।
– फ्रीक्वेंसी डिवीजन डुप्लेक्सिंग व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले आईएमटी फ्रीक्वेंसी बैंड अर्थात् 600 मेगाहर्ट्ज, 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज और 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड को आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा प्रदान करने के लिए उपयोग की अनुमति दी जानी चाहिए।
– राष्ट्रीय आवृत्ति आवंटन योजना (एनएफएपी) की आवृत्ति आवंटन तालिका में संशोधन करके आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा के लिए चिह्नित आवृत्ति बैंडों में मोबाइल सैटेलाइट सर्विस को द्वितीयक सेवा के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। इसके लिए भारत-विशिष्ट फुटनोट भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऐसे आवृत्ति बैंडों में द्वितीयक मोबाइल सैटेलाइट सर्विस परिचालन केवल आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा तक सीमित रहेगा। यह सेवा घरेलू और सीमापार, दोनों प्रकार के परिचालनों के संबंध में गैर-हस्तक्षेप और गैर-संरक्षण के आधार पर संचालित होगी।
– देश में पहले से संचालित सेवाओं को आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा से उत्पन्न होने वाले किसी भी हानिकारक हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने के लिए सभी बीमों से प्राप्त संयुक्त सिग्नल की विद्युत क्षेत्र तीव्रता की सीमाएं निर्धारित की जानी चाहिए।
5. वित्तीय शर्तें
– उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं के लिए लागू प्राधिकरण शुल्क, स्पेक्ट्रम शुल्क और वित्तीय शर्तें निर्धारित करते समय, जिनमें सकल राजस्व, समायोजित सकल राजस्व ,समायोजित सकल राजस्व की परिभाषाएं तथा अन्य वित्तीय शर्तें शामिल हैं, ट्राई ने उपग्रह आधारित सेवाएं प्रदान करने के लिए वर्टिकली इंटीग्रेटेड सेवा मॉडल और अनबंडल्ड साझा नेटवर्क मॉडल के बीच नियामकीय समानता बनाए रखने के सिद्धांत का पालन किया है।
1. सकल राजस्व ,लागू सकल राजस्व , समायोजित सकल राजस्व की परिभाषा तथा उपग्रह संचार नेटवर्क शुल्क का निर्धारण
– सकल राजस्व (GR): इसमें पात्र सेवा प्राधिकृत संस्थाओं को अंतिम उपयोगकर्ताओं तक उपग्रह आधारित सेवाएं प्रदान करने के लिए सेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क उपलब्ध कराने से उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्था को प्राप्त होने वाला समस्त राजस्व तथा नेटवर्क संबंधी गतिविधियों से होने वाली अन्य सभी आय शामिल होगी। इसमें संबंधित व्यय मदों की कोई कटौती नहीं की जाएगी।
