उप-राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उप-राष्ट्रपति भवन में इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस (2025 बैच) के प्रोबेशनर्स से बातचीत की और उनसे देश की सेवा करने के इस मौके का पूरी लगन, ईमानदारी और सार्वजनिक जिम्मेदारी की मजबूत भावना के साथ बेहतरीन इस्तेमाल करने का आग्रह किया।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan interacted with Indian Defence Estates Service probationers (2025 Batch) at Uprashtrapati Bhavan today. He urged them to serve with integrity, firmness and a strong sense of responsibility while safeguarding defence assets and advancing… pic.twitter.com/pE8pfrdZLp
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि उनमें से कई छोटे शहरों से आए हैं, जो यह दिखाता है कि लगन और कड़ी मेहनत से कथित बाधाओं को पार किया जा सकता है। उन्होंने उनसे अपनी उपलब्धि पर गर्व करने और साथ ही एक लोक सेवक के तौर पर सौंपी गई जिम्मेदारी के प्रति जागरूक रहने को कहा।
देश भर में लगभग 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि के प्रबंधन की 'डिफेंस एस्टेट्स ऑर्गनाइज़ेशन' (रक्षा संपदा संगठन) की अहम जिम्मेदारी पर जोर देते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि इस काम में राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा, नागरिक सुविधाएं देना, रक्षा बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना और सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल तैयारी में मदद करना शामिल है।
उप-राष्ट्रपति ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में संगठन के कदमों, खासकर 'ई-छावनी' पहल की सराहना की, जिसने छावनियों में स्मार्ट गवर्नेंस और एकीकृत जन-सेवा वितरण को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि एआई, जीआईएस, ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजिंग, ऑटोमेटेड चेंज डिटेक्शन और 3-डी विजुअलाइजेशन जैसी नई तकनीकें रक्षा भूमि प्रबंधन की सटीकता, पारदर्शिता और कार्यक्षमता को काफी बेहतर बना सकती हैं।
तकनीक के साथ-साथ मानवीय जिम्मेदारी भी जरूरी होने पर जोर देते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा, "तकनीक को जवाबदेही को मजबूत करना चाहिए, न कि उसकी जगह लेनी चाहिए।" उन्होंने प्रोबेशनर्स से अपने कर्तव्यों का पालन करने में अडिग रहने का आग्रह किया और कहा कि तकनीक भले ही फेल हो जाए, लेकिन एक अधिकारी की जिम्मेदारी की भावना और दृढ़ता कम नहीं होनी चाहिए।
तेजी से बदलते तकनीक और विज्ञान के माहौल का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से अपने ज्ञान और कौशल को लगातार बेहतर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने लगातार क्षमता निर्माण के लिए आईजीओटी कर्मयोगी को एक महत्वपूर्ण मंच बताया और प्रोबेशनर्स को नए विचारों और नवाचार के प्रति खुला नजरिया रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
