नई दिल्ली के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में आयोजित शिल्प समागम मेला 2026 में भारत की कलात्मक परंपराओं, स्वदेशी शिल्पकला और जीवंत सांस्कृतिक विविधता की शानदार झलक देखने को मिल रही है, जिससे बड़ी संख्या में आगंतुक उत्साहपूर्वक मेले की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित यह 15 दिवसीय मेला समावेशी उत्सव के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। यह मेला 15 नवंबर, 2026 तक आगंतुकों के लिए खुला रहेगा।
‘प्रकाश और परंपरा – ज्योति से ज्योति जलाएँ’ विषयवस्तु पर आधारित यह मेला भारत की समृद्ध पारंपरिक शिल्प विरासत और उत्सवी रोशनी की परंपरा को प्रदर्शित करता है। आगंतुकों को बहुआयामी सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करने के लिए मेले को सात विशिष्ट विषयगत क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
इनमें कुशल शिल्पकारों द्वारा हस्तशिल्प की सजीव प्रस्तुतियों के लिए ‘कला आँगन’, दीपों और उत्सवी रोशनी के आकर्षक संग्रह के लिए ‘प्रकाश चौक’, विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्री के लिए ‘पूजा पथ’, घर की सजावट से जुड़ी अनूठी और पारंपरिक वस्तुओं के लिए ‘सजावट बाज़ार’, पारंपरिक वस्त्रों और फैशन की शानदार श्रृंखला के लिए ‘घराना’, विभिन्न क्षेत्रों के विविध व्यंजनों के लिए ‘स्वाद चौक’ तथा सांस्कृतिक गतिविधियों और शाम की प्रस्तुतियों के जीवंत केंद्र के रूप में ‘मंच’ शामिल हैं।
इस मेले में 130 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई कर्मचारियों और दिव्यांगजनों से जुड़े शिल्पकारों एवं लाभार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और रचनात्मक कलाकृतियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इन शिल्पकारों के लिए आर्थिक अवसरों को सुदृढ़ करने और उनके उत्पादों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से मेले में सशक्तीकरण से जुड़े प्रमुख घटकों को भी शामिल किया गया है।
मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है। अब तक आयोजित ऐसे 15 मेलों के माध्यम से अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और सफाई कर्मचारियों से जुड़े 1,000 से अधिक शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसरों का लाभ मिला है।
इसमें भारत ट्यूलिप पहल भी शामिल है, जो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिल्पकारों को सीधे व्यापक बाजारों से जोड़ती है। इससे उन्हें अपने उत्पादों की बेहतर पहचान, उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच और सतत आर्थिक विकास के अवसर प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही, पर्पल फेस्ट दिव्यांगजनों की रचनात्मकता, क्षमताओं और सक्रिय योगदान का उत्सव मनाता है तथा समान अवसरों और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देता है।
प्रतिदिन शाम को ‘मंच’ पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम और गतिविधियां मेले के प्रमुख आकर्षणों में से एक हैं, जो आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों के कलाकार और सांस्कृतिक दल एक साथ आकर रंगारंग लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत और क्षेत्रीय कला रूपों की मनमोहक प्रस्तुतियां दे रहे हैं।
ये सांध्यकालीन कार्यक्रम एक ही मंच पर भारत की बहुलतावादी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की मनमोहक झलक प्रस्तुत करते हैं। ये कार्यक्रम मेले में उत्सवमय माहौल बनाने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देते हैं।
मेले में भाग लेने वाले लाभार्थियों को मंत्रालय के शीर्षस्थ निगमों का सहयोग प्राप्त है। इनमें नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) तथा नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (एनडीएफडीसी) शामिल हैं।
शिल्पकारों को निःशुल्क स्टॉल, यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता तथा उनके उत्पादों के परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
शिल्प समागम मेला 2026 के माध्यम से मंत्रालय आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ करने, उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए अपने प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। मंत्रालय नागरिकों, परिवारों और कला प्रेमियों से दिल्ली हाट आने, पारंपरिक शिल्पकलाओं को देखने, शिल्पकार समुदायों को प्रोत्साहित करने तथा देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का अनुभव करने का आह्वान करता है।
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