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आईपीआरडी-2026 सहयोगात्मक महासागर शासन और जिम्मेदार समुद्री प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ संपन्न

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DetailInformation
Date05 November 2026 (Thursday)
Time7:20 PM
Topic / Ministryरक्षा मंत्रालय
Languageहिन्दी · Read in English
Reading time4 min (693 words)

तीन दिवसीय भारतीय नौसेना का वार्षिक उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संवाद, इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय संवाद 2026(आईपीआरडी-2026), 05 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन(एनएमएफ) के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में, क्षेत्रीय समुद्री सहयोग के लिए व्यावहारिक रास्ते तलाशने के उद्देश्य से, पांच पेशेवर विषयगत सत्रों और वरिष्ठ-स्तरीय चर्चाओं के माध्यम से 'इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग' पर विचार-विमर्श किया गया।

समापन दिवस का शुभारंभ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि के विशेष संबोधन के साथ हुआ, जिसके बाद सीडीएस ने श्रोताओं के साथ एक विचार-विमर्श सत्र में भाग लिया। इसके पश्चात ‘महासागर शासन और समुद्री सुदृढ़ता के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण’ विषय पर एक सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह(सेवानिवृत्त) ने किया। इस सत्र में फिलीपींस विश्वविद्यालय की प्रोफेसर देवो फ्लोरेंस ओंडा ने महासागर शासन के क्षेत्र में फिलीपींस के अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने के लिए एक सहयोगात्मक योजना पर अपने विचार रखे। अंतरराष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण में पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ डॉ. मैरी बोरेल-मैककिनन ने गहरे समुद्र में अनुसंधान संबंधी समानतापूर्ण साझेदारियों और संसाधन शासन के मुद्दों का विश्लेषण किया। आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन(सीडीआरआई) के श्री रामराज नरसिम्हन ने अवसंरचना रोधी द्वीपीय राज्यों(आईआरआईएस) कार्यक्रम के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी दी, जबकि स्वीडन की फ्यूचर मैरीटाइम की सुश्री सोफिया फर्स्टेनबर्ग-स्टॉट ने इस बात पर विचार व्यक्त किए कि समुद्री विज्ञान और जहाजरानी संचालन के बीच समन्वय को किस प्रकार मजबूत किया जा सकता है। इस सत्र में एक साझा चुनौती के चार प्रमुख आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें वैज्ञानिक क्षमताओं को शासन व्यवस्था से जोड़ने, अनुसंधान साझेदारियों को अधिक समानतापूर्ण बनाने, संवेदनशील द्वीपीय देशों की आपदा-सहनशीलता को मजबूत करने तथा यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता शामिल थी कि वैज्ञानिक ज्ञान समुद्री उद्योग और सार्वजनिक संस्थानों के निर्णयों का आधार बने।

आईपीआरडी-2026 का अंतिम सत्र ‘परिवर्तनकारी समुद्री प्रौद्योगिकियां और दोहरे उपयोग के निहितार्थ’ विषय पर केंद्रित था। इस सत्र का संचालन भारतीय नौसेना के रियर एडमिरल गुनींदर सिंह जावांडा(सेवानिवृत्त) ने किया। इस सत्र में वक्ताओं ने विषय के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। जर्मनी स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज(आईआईएसएस) की सुश्री डोंगयून चो ने समुद्री क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) और क्वांटम प्रौद्योगिकियों के संबंध में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया। ब्रुसेल्स स्कूल ऑफ गवर्नेंस की डॉ. ईवा पेज़ोवा ने दोहरे उपयोग वाली समुद्री प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार शासन के लिए यूरोपीय संघ-हिंद-प्रशांत तंत्र पर अपने विचार रखे। स्टेलेनबॉश विश्वविद्यालय से जुड़े दक्षिण अफ्रीकी नौसेना के कैप्टन मार्क ब्लेन(सेवानिवृत्त) ने इन प्रौद्योगिकियों के अनुरूप स्वयं को ढालने में छोटी और मध्यम आकार की नौसेनाओं की सहायता के लिए सहयोगात्मक रोडमैप पर चर्चा की, जबकि कमोडोर अरुण गोलाया(सेवानिवृत्त) ने इन प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारीपूर्वक अपनाने के लिए नौसेना के बीच परिचालन स्तर पर सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किए। इन चर्चाओं में उभरती समुद्री प्रौद्योगिकियों के दोहरे स्वरूप को रेखांकित किया गया। साथ ही, सहयोगात्मक अनुसंधान, व्यावहारिक क्षमता निर्माण और ऐसी संस्थागत व्यवस्थाओं की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, जिनके माध्यम से अलग-अलग संसाधनों और आवश्यकताओं वाले साझेदार तकनीकी बदलाव की प्रक्रिया में सार्थक रूप से भागीदारी कर सकें।

भारत सरकार के रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह के समापन संबोधन के साथ तीन दिवसीय इस भव्य सम्मेलन का गरिमापूर्ण एवं स्मरणीय समापन हुआ। तीन दिनों तक चले आईपीआरडी-2026 में सैन्य क्षेत्र के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, समुद्री उद्योग के प्रतिनिधियों, भारत और मित्र देशों के राजनयिकों, शिक्षाविदों, मीडिया प्रतिनिधियों, प्रतिष्ठित नागरिकों तथा नई दिल्ली के सक्रिय छात्र समुदाय ने व्यापक रूप से भाग लिया। बीस देशों के 40 से अधिक विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित वक्ताओं ने आईपीआरडी की केंद्रीय विषयवस्तु 'इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग’ पर अपने विचार साझा किए। इससे 'इंडो-पैसिफिक महासागर पहल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग स्तंभ के अंतर्गत व्यावहारिक परिणामों को अधिक स्पष्ट एवं ठोस स्वरूप देने में सहायता मिली। इस सम्मेलन ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने तथा समुद्री सुदृढ़ता को मजबूत करने के लिए सहयोगात्मक विजन को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को भी और मजबूत किया, जिससे भारत के समुद्री विजन ‘महासागर’(MAHASAGAR: क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) को और अधिक स्पष्ट अभिव्यक्ति प्रदान की।

पीके/केसी/आरटी/पीकेपी

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