भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नीलगिरी के कूनूर में उपासी (यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया) चाय अनुसंधान फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने वैश्विक बाजार में भारतीय चाय को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु व्यापक अनुसंधान, आधुनिकीकरण, ब्रांडिंग और मूल्य वर्धन (वैल्यू एडिशन) का आह्वान किया।
Vice-President Thiru C. P. Radhakrishnan graced the Centenary Conference of the UPASI (United Planters’ Association of Southern India) Tea Research Foundation at Coonoor, Nilgiris, today.The Vice President called for strengthening tea research, modernising factories, improving… pic.twitter.com/TCZHWM0HTn
उपासी चाय अनुसंधान फाउंडेशन को चाय उद्योग, बागान मालिकों और श्रमिकों की सेवा के 100 वर्ष पूरे करने पर बधाई देते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने चाय के क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों में इस फाउंडेशन के सदी भर के योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक और चाय का उपभोग करने वाले देशों में से एक है। उन्होंने चाय की खेती के साथ-साथ उसके कुशल प्रसंस्करण एवं उत्पादन पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उपराष्ट्रपति ने चाय सेक्टर के खासकर उन क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ाने पर जोर दिया, जिनसे किफायत, गुणवत्ता और उत्पादकता बेहतर हो सके। उन्होंने बागान मालिकों को गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप काम करने के हेतु शिक्षित करने की जरूरत पर भी जोर दिया, क्योंकि वैश्विक चाय बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है।
चाय का उत्पादन करने वाले अन्य देशों से मिल रही प्रतिस्पर्धा का उल्लेख करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को इस बात पर गौर करना चाहिए कि अपनी चाय के विपणन (मार्केटिंग) को और बेहतर कैसे बनाया जाए, राजस्व कैसे बढ़ाया जाए और निरंतर अनुसंधान एवं नवाचार के जरिए बागान क्षेत्र (प्लांटेशन सेक्टर) की चुनौतियों से कैसे निपटा जाए।
उन्होंने संबंधित हितधारकों से चाय उद्योग की जरूरतों का एक व्यवस्थित आकलन करने और ठोस परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने हेतु केन्द्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने अनुसंधान के लिए पेशेवरों की पहचान करने, चाय के कारखानों को आधुनिक बनाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप भारतीय चाय का उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु जरूरी नवीनीकरण करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
