भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग के अंतर्गत केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) और प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय ने स्वस्थ और नशामुक्त समाज को प्रोत्साहन देने हेतु निवारक नशीली दवाओं के प्रति जागरूकता, युवाओं के सशक्तिकरण और सामुदायिक संपर्क को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 18 सितंबर, 2026 को राजस्थान के माउंट आबू में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नशा मुक्त भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में है और सतत निवारक जागरूकता, युवा सहभागिता और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से नशा मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों में योगदान देना चाहती है।
माउंट अबू में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के साथ केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और ब्रह्माकुमारीज के प्रतिनिधि
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के उप नारकोटिक्स कमिश्नर श्री नरेश बुंदेल और ब्रह्माकुमारीज के मेडिकल विंग सचिव डॉ. बनारसीलाल साह ने ग्वालियर स्थित केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के नारकोटिक्स कमिश्नर डॉ. दिनेश कुमार बिसेन की मौजूदगी में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और ब्रह्माकुमारीज के मध्य 18 सितंबर, 2026 को माउंट आबू में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया गया
समझौता ज्ञापन के तहत मादक पदार्थों के प्रति जागरूकता अभियान, युवा सशक्तिकरण पहल और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों की अवधारणा, आयोजन, कार्यान्वयन और मूल्यांकन के लिए एक सहयोगात्मक फ्रेमवर्क प्रदान किया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह सहयोग मूल्य-आधारित निवारक शिक्षा, मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता और मादक द्रव्यों के सेवन से प्रभावित लोगों के लिए उपलब्ध परामर्श, पुनर्वास और उपचार के विकल्पों की जानकारी प्रदान करने पर केंद्रित है।
समझौते के अंतर्गत, दोनों पक्ष सीबीएन की युवा रक्षा पहल के अंतर्गत सेमिनार, संगोष्ठियों, परस्पर संवादात्मक कार्यशालाओं, मल्टीमीडिया प्रदर्शनियों, जागरूकता रैलियों, पोस्टर-डिजाइन प्रतियोगिताओं और डिजिटल जागरूकता गतिविधियों का सहयोग करेंगे। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, छात्रावासों, कोचिंग केंद्रों और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों और कृषि व पारंपरिक खेती वाले क्षेत्रों के युवाओं पर विशेष ध्यान देने की परिकल्पना की गई है।
