ललित कला अकादमी (राष्ट्रीय कला अकादमी) भारत में समकालीन दृश्य कला की सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक प्रदर्शनियों में से एक, 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी (एनईए) का आयोजन कर रही है। यह प्रदर्शनी कलाकारों को अपनी रचनात्मक कला को प्रदर्शित करने तथा दर्शकों को देश की विविध एवं विकसित होती दृश्य कला से जुड़ने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करती है।
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी को पूरे भारत के कलाकारों से अत्यधिक समर्थन मिला है। अकादमी को 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,495 कलाकारों से 6,175 कलाकृतियाँ प्राप्त हुईं। एक सख़्त चयन प्रक्रिया के बाद, प्रथम-स्तरीय जूरी ने प्रदर्शनी में प्रदर्शन के लिए 270 कलाकृतियों का चयन किया।
चयनित कृतियां चित्रकला, मूर्तिकला, प्रिंटमेकिंग, ड्राइंग और मिक्स- मीडियम सहित विभिन्न प्रकार की कलात्मक पद्धतियों, सामग्रियों और तकनीकों को दर्शाती हैं। यह प्रदर्शनी समकालीन भारतीय कलात्मक अभिव्यक्ति की समृद्धि और नए माध्यमों, विचारों एवं रूपों के साथ कलाकारों के निरंतर जुड़ाव को प्रदर्शित करती है।
पुरस्कार के लिए कलाकृतियों को चुनने के लिए बनाई गई द्वितीय-स्तरीय जूरी ने ललित कला अकादमी पुरस्कारों के लिए 20 कलाकारों की 20 कलाकृतियों को चुना।
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के पुरस्कार विजेता
पुरस्कृत कलाकृति
माई एंटायर वर्ल्ड – I
गोपाल चंद्र नस्कर
द ट्यून ऑफ़ द श्रीमद भगवद गीता
कैनवस पर ऐक्रेलिक
किशोर कुमार नरखादीवाला
होपलेस सेटलमेंट
टैंजिबल ड्रीम्स
निमाई सिंह सरुंगबम
पंकज कुमार शर्मा
हेलोएड ट्रैवलर – III
वेयर द वॉल्स रिमेंबर
मिक्स्ड मीडियम
प्रीतम मधुकर देउसकर
ऑफ़ टाइम एंड द सिटी
राजेंद्र प्रसाद
सुजाता विद बुद्ध
रमेश विट्ठल थोराट
रविराम रामकृष्णन
कॉपर, ऑक्सीकृत, वेल्डेड
व्हेन मेमोरीज कम बैक – 7
संजय कुमार साहनी
संजीब कुमार गोगोई
ऐक्रेलिक & तैल चित्र
अट्रेक्शन ऑफ़ सिम्पलिसिटी
सिद्धार्थ शाहजीराव शिंगाडे
व्हील ऑफ़ ए क्राउडेड सिटी
कोई अन्य माध्यम
विजेंद्र शर्मा
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी न केवल कलात्मक पहचान का एक मंच है, बल्कि यह भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान देती है। कलाकारों, दर्शकों, संग्राहकों और संस्थानों को एक साथ लाकर यह प्रदर्शनी कलाकारों के लिए अधिक पहचान और व्यावसायिक अवसर पैदा करती है। कलाकृतियों का प्रदर्शन और बिक्री भी कलाकारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाती है, जिससे उनके कलात्मक काम को सहयोग मिलता है और दृश्य कला के लिए एक अधिक संवहनीय इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलती है।
