प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश के सहकारिता क्षेत्र को सशक्त, आधुनिक, पारदर्शी और व्यापक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने आज कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिकोडी तालुका में नांदी स्थित श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड (मल्टी-स्टेट) के नए प्रधान कार्यालय के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी, कर्नाटक राज्य के कई गणमान्य व्यक्ति एवं सहकारिता क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि आज का दिन कर्नाटक में सहकारिता क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और आनंद का दिन है। श्री मोहोल ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह और केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की ओर से संस्था की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।
केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री ने कहा कि श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के लगभग 4 लाख 60 हजार सदस्य हैं, इसकी 263 शाखाएं देशभर में विस्तारित हैं और सोसाइटी का कारोबार 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि आज संस्था का 36वां स्थापना दिवस भी है। उन्होंने इतने बड़े स्तर पर सहकारिता का कार्य संचालित करने वाली संस्था की पूरी टीम को बधाई दी।
श्री मोहोल ने कहा कि देश में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सहकारिता का बड़े स्तर पर विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के सहकारिता क्षेत्र में श्री अण्णासाहेब जोल्ले और उनकी धर्मपत्नी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सहकारी चीनी कारखानों, सहकारी बैंकों और क्रेडिट सोसाइटियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए श्री मोहोल ने उनके योगदान की सराहना की।
केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री ने कहा कि देश की सहकारिता व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का अभिनंदन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में आज साढ़े आठ लाख से अधिक सहकारी सोसाइटियां और सहकारी संस्थाएं कार्य कर रही हैं और लगभग 32 करोड़ लोग इन सहकारी संस्थाओं के सदस्य हैं। लगभग 20 से 25 करोड़ परिवार सीधे तौर पर सहकारिता से जुड़े हैं और इस प्रकार देश की लगभग आधी आबादी किसी न किसी रूप में सहकारिता व्यवस्था से जुड़ी हुई है।
