प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विजन को आगे बढ़ाते हुए तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़, आधुनिक और पेशेवर बनाने तथा पूरे सहकारी पारितंत्र में मजबूत संस्थागत क्षमताओं का निर्माण करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सहकारी क्षेत्र के कार्मिकों और हितधारकों के प्रशिक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करना इस प्रयास का एक महत्वपूर्ण घटक है।
इसी दिशा में, राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण रूपरेखा (NCTF) 2026 पर राष्ट्रीय स्तर की एजेंडा-निर्धारण परामर्श बैठक का आयोजन “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय (TSU) द्वारा भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से 24 सितंबर 2026 को अटल अक्षय ऊर्जा भवन, नई दिल्ली में किया गया।
परामर्श बैठक का उद्घाटन सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने किया। इसमें सहकारिता मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, राष्ट्रीय स्तर के सहकारी महासंघों, राज्य सहकारी संघों, सहकारी प्रशिक्षण संस्थानों, क्षेत्रीय विकास संगठनों, विश्वविद्यालयों तथा सहकारी क्षेत्र में प्रशिक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण से जुड़े अन्य संस्थानों ने भाग लिया।
परामर्श बैठक को संबोधित करते हुए श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने जोर देकर कहा कि सहकारी प्रशिक्षण का ध्यान केवल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और परिणामों पर होना चाहिए। उन्होंने इस आवश्यकता को रेखांकित किया कि प्रशिक्षण संबंधी हस्तक्षेपों से संस्थागत क्षमताएं अधिक सुदृढ़ हों, पेशेवर दक्षताओं में सुधार हो और सहकारी संस्थाओं तथा उनके सदस्यों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित हों।
इस अवसर पर “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) एस. पी. सिंह ने “सहकार से समृद्धि” के विजन को साकार करने में राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण रूपरेखा के एक महत्वपूर्ण सहायक के रूप में महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने सहकारी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से जुड़ी संस्थाओं की क्षमताओं को एक साझा और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढांचे के माध्यम से एक साथ लाने और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो अधिक समन्वय, गुणवत्ता, प्रासंगिकता, पहुंच और निरंतरता सुनिश्चित कर सके तथा विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की विविध आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी भी बना रहे।
