पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर तीसरे बिम्सटेक सम्मेलन का आज गोवा में शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है तथा अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), गोवा इसका नोडल संस्थान है।
दो दिवसीय सम्मेलन के साथ पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधन एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों पर बिम्सटेक नोडल समूह की दूसरी बैठक भी आयोजित की जा रही है। सम्मेलन में बिम्सटेक सदस्य देशों के विशेषज्ञ, अधिकारी और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव एवं उद्घाटन सत्र की अध्यक्ष श्रीमती मोनालिसा दास ने बिम्सटेक टास्क फोर्स फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (BTFTM) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यबल अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण, मानकीकरण, औषध संहिताओं के विकास, नियामक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग को गति दे सकता है। उन्होंने प्रस्तावित बिम्सटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ट्रेडिशनल मेडिसिन का भी उल्लेख किया, जिसकी घोषणा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में बैंकॉक में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान की थी।
अपने उद्घाटन भाषण में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. वैद्य पी.के. प्रजापति ने कहा कि बिम्सटेक क्षेत्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, जैविक संसाधनों और सामुदायिक ज्ञान की समृद्ध एवं विविध विरासत का केंद्र है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य ऐसा सहयोगी ढांचा विकसित करना है, जो पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के साथ वैध अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा दे तथा पूर्व सूचित सहमति, पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों और न्यायसंगत लाभ-साझेदारी के माध्यम से समुदायों के हितों की रक्षा करे।
बिम्सटेक के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा स्वास्थ्य एवं मानव संसाधन विकास प्रभाग के निदेशक श्री कदिरकामु कंदासामी योगनादन ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग का अंतिम उद्देश्य लोगों के कल्याण में सुधार करना, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना और पारंपरिक चिकित्सा की समृद्ध विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण, बौद्धिक संपदा अधिकार, आनुवंशिक संसाधन, पहुंच एवं लाभ-साझेदारी, पूर्व सूचित सहमति, सामुदायिक अधिकार, तथा विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से संबंधित पहलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
