नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कर्मचारियों के बच्चों के लिए शिशु देखभाल केंद्र तथा रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), जो प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभागों में भी राज्य मंत्री हैं, ने इस अवसर पर विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 को बेहतर कार्यालय व्यवस्था और कर्मचारी कल्याण से जोड़कर देखने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 26 मई 2014 से शुरू प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि केवल प्रक्रियाओं की सरलता और पारदर्शिता पर्याप्त नहीं हैं। सरकारी संस्थानों में ऐसी सुविधाएं भी होनी चाहिए जो कर्मचारियों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करें। विशेषकर कामकाजी अभिभावकों के लिए इससे जिम्मेदारियां निभाना आसान होगा और जनसेवाओं पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
सरकारी कामकाज में बदलाव की पहल को डॉ. सिंह ने 'सुधार एक्सप्रेस' कहा। उन्होंने बताया कि जिम, पैंट्री और भोजन संबंधी सुविधाएं कर्मचारी-अनुकूल कार्यस्थल बनाने का हिस्सा हैं। कर्तव्य भवन-3 में स्थापित क्रेच से माता-पिता को बच्चों की देखभाल की चिंता कम करने में सहायता मिलेगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मानकों के अनुरूप बनाए गए इस केंद्र का स्थान कर्तव्य भवन-3 है। शिशुगृह 2,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में फैला है और इसमें करीब 30-35 बच्चों की देखभाल हो सकती है। अभी 27 बच्चों का पंजीकरण हुआ है; बाकी स्थानों पर नामांकन जारी है।
क्रेच में बच्चों के उपयोग के अनुरूप शौचालय, खेल और सीखने की सामग्री, ऑडियो-विजुअल उपकरण तथा पीने का साफ पानी उपलब्ध कराया गया है। सोने, पोषण और देखभाल के लिए अलग व्यवस्था के साथ रसोई या ड्राई पैंट्री भी है। सीसीटीवी, गद्देदार दीवारें और फर्श तथा प्राथमिक उपचार के लिए मेडिकल किट सुरक्षा उपायों में शामिल हैं।
मंत्री के अनुसार कामकाजी माताओं के लिए कार्यस्थल के पास भरोसेमंद शिशु देखभाल बहुत जरूरी है। इससे नौकरी के साथ बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण की जिम्मेदारी संभालने की कठिनाई कम हो सकती है। क्रेच में बच्चों को भेजने वाले कर्मचारियों ने भी बताया कि देखभाल की व्यवस्था होने से वे काम पर बेहतर ध्यान दे पा रहे हैं।
कर्तव्य भवन-3 की ये नई सुविधाएं प्रशासनिक दक्षता को कर्मचारियों की जरूरतों से जोड़ती हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसा कार्यालय वातावरण देना है जिसमें कर्मचारी अपने दायित्व निभा सकें और लोगों तक सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचें।
शिशु देखभाल केंद्र की जिम्मेदारी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अंतर्गत गृह कल्याण केंद्र (जीकेके) को दी जाएगी। केंद्रीय कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़ी यह संस्था दिल्ली में करीब छह और क्रेच चलाती है। शिक्षकों और देखभाल करने वाले कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के लिए जीकेके की गैर सरकारी संस्था मोबाइल क्रेच से साझेदारी है।
कार्यक्रम में खोला गया क्रेच सरकारी परिवारों के लिए संस्थागत सहायता का उदाहरण है, जबकि रक्तदान शिविर स्वैच्छिक सामाजिक सेवा का अवसर प्रदान करता है। दोनों गतिविधियों के जरिए सार्वजनिक जिम्मेदारी, समावेशी व्यवस्था और कर्मचारी हित की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आधुनिक और नागरिकों पर केंद्रित प्रशासन का लक्ष्य कर्तव्य भवन में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कार्यस्थल पर कर्मचारियों की गरिमा, देखभाल और समावेशन की आवश्यकता बताई तथा शिशुगृह की व्यवस्था से जुड़े कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, गृह कल्याण केंद्र और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की।
स्वच्छता और विशेष अभियान 6.0 के लक्ष्यों के अनुरूप कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने सरकारी उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अपनाए हैं। पहले उपयोग में रहे अठारह डीजल-पेट्रोल वाहनों को बदलने की इस पहल से कार्यालय के परिवहन को अधिक स्वच्छ और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया गया है।
उद्घाटन समारोह में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह के साथ संबंधित मंत्रालयों और विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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