केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में चौथे ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार समारोह और ‘इको वॉरियर’ सम्मेलन की अध्यक्षता की। इन कार्यक्रमों को भारतीय वन सेवा संघ (आईएफएसए) और ‘इंडियन मास्टरमाइंड्स’ ने आयोजित किया। वन, वन्यजीवन और पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ वन अधिकारियों, संरक्षणवादियों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया।
Honoured India’s environmental champions at the 4th Eco Warrior Awards 2026 in New Delhi today.From beat guards and rangers to frontline forest personnel, they protect our forests, respond to fires and safeguard wildlife habitats—turning conservation policy into action on the… pic.twitter.com/3V1WLhItIg
श्री भूपेंद्र यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के वन, वे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय अवसंरचनाएं हैं जो जल, जलवायु, मिट्टी, जैव विविधता और आजीविका में सहायता करते हैं। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों के योगदान की सराहना करने के साथ ही संरक्षण भागीदारों के रूप में जनजातीय तथा वन पर निर्भर समुदायों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संरक्षण अधिक जटिल हो गया है। वन अधिकारियों को विकास, आजीविका, मानवीय आकांक्षाओं और वन्यजीवों की जरूरतों को संतुलित करते हुए संपूर्ण पारिस्थितिकीय परिदृश्यों का प्रबंधन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन, बार-बार होने वाली और अप्रत्याशित चरम मौसम की घटनाएं, दावानल, जल तनाव, पर्यावास विखंडन और आक्रामक प्रजातियां उभरती हुई चुनौतियां हैं। उन्होंने एक ऐसे परिदृश्य दृष्टिकोण का आह्वान किया जो वनों, वन्यजीवों, कृषि, जल, आजीविका और मानव बसावटों को एक साथ जोड़ता है।
श्री यादव ने कहा कि संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने भारतीय वन सेवा को भारत की प्राकृतिक पूंजी की देखरेख का जिम्मा संभालने वाली सेवा बताया। उन्होंने उन बीट गार्ड, रेंजर्स तथा अन्य कर्मचारियों सहित अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों के योगदान की सराहना की जो वनों की गश्त करते, दावानल से निपटते और वन्यजीव आवासों की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों के योगदान को कभी नहीं भुलाया जाना चाहिए। वे ऐसे लोग हैं जो संरक्षण नीति को जमीन पर संरक्षण में बदलते हैं।
