स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी सड़क निर्माण लागत को लगभग 40 प्रतिशत तक कम कर सकती है, जबकि पारंपरिक सड़कों की तुलना में चार गुना अधिक मजबूती प्रदान करती है। यह बात आज केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि यह तकनीक सड़कों के रखरखाव चक्र को भी काफी बढ़ा सकती है—इसमें लगभग 15 वर्षों के बाद ही रखरखाव की आवश्यकता होती है। यह एक ऐसी क्रांतिकारी ब्रेकथ्रू है जिसके प्रभाव न केवल सड़क इंजीनियरिंग पर, बल्कि संपूर्ण बुनियादी ढांचा अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस स्वदेशी तकनीक को एक परियोजना से कई परियोजनाओं तक और एक राज्य से कई राज्यों तक ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ-साथ रेलवे, अन्य सरकारी विभागों, राज्य सरकारों, निजी बिल्डरों, ठेकेदारों और इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटरों द्वारा भी इसे व्यापक रूप से अपनाए जाने पर बल दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) नई दिल्ली और जिंदल स्टील लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से हासिल किए गए 'प्रसंस्कृत स्टील स्लैग एग्रीगेट्स से बनी विश्व की सबसे लंबी सड़क' के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रदान किये जाने वाले समारोह में बोल रहे थे। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बनी 1.85 किलोमीटर लंबी यह सड़क स्वदेशी तकनीक के बड़े पैमाने पर विस्तार को दर्शाती है, जो इस्पात उत्पादन के उप-उत्पाद (प्रसंस्कृत स्टील स्लैग) को सड़क निर्माण के लिए एग्रीगेट्स में परिवर्तित करती है। इस कार्यक्रम के दौरान सड़क का वर्चुअल उद्घाटन, एक साइंटिफिक डॉक्यूमेंट्री का विमोचन, सीएसआईआर-सीआरआरआई और जिंदल स्टील के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर, 'स्टील ग्रिट' ब्रांड का शुभारंभ और प्रोजेक्ट टीम का सम्मान भी संपन्न हुआ।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह सफल पहल एक साथ इस सरकार की एक से अधिक प्रमुख प्राथमिकताओं को पूरा करती है, जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का वेस्ट टू वेल्थ रीसाइक्लिंग विकल्पों पर बार-बार दिया जाने वाला जोर भी शामिल है।
