भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अवांछित वाणिज्यिक संचार (यूसीसी) पर अंकुश लगाने, उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने और दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियामक ढांचे को और मजबूत करने हेतु दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम, 2018 (टीसीसीसीपीआर, 2018) में संशोधन किया है।
ट्राई ने 13 मार्च 2026 को "दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026" का मसौदा जारी किया, ताकि हितधारकों से मौजूदा नियामक ढांचे को मजबूत करने, प्रवर्तन तंत्र को बढ़ाने और यूसीसी की रोकथाम और विनियमन में उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए आवश्यक प्रमुख नियामक संशोधनों पर उनके विचार प्राप्त किए जा सकें। परामर्श में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें नियामक प्रवर्तन में सहायता के लिए एआई/एमएल-आधारित संदिग्ध यूसीसी पहचान का लाभ उठाना, शिकायत-आधारित कार्रवाई तंत्र को मजबूत बनाना, संस्थाओं के पास उपलब्ध पुरानी सहमतियों को शामिल करने के लिए स्पष्ट सहमति के दायरे का विस्तार करना, अपील तंत्र प्रदान करना, प्रेषकों और टेलीमार्केटरों की जवाबदेही को मजबूत करना, एप्लीकेशन-टू-पर्सन (ए2पी) कॉलों को विनियमित करना, हेडर और सामग्री टेम्पलेट्स के दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा उपायों को मजबूत करना आदि शामिल हैं।
मसौदा विनियमों पर टिप्पणियां और प्रति-टिप्पणियां क्रमशः 19 अप्रैल, 2026 और 4 मई, 2026 तक प्राप्त हुईं । हितधारकों के साथ खुली बैठक 3 जून, 2026 को आयोजित की गई। हितधारकों की प्रतिक्रिया पर विचार करने और विस्तृत विश्लेषण करने के बाद, प्राधिकरण ने आज दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 को लागू किया है।
संशोधनों की प्रमुख विशेषताएं
(i) नियामक प्रवर्तन में सहायता के लिए एआई/एमएल-आधारित संदिग्ध यूसीसी का पता लगाने का लाभ उठाना
(क) प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) ने संदिग्ध स्पैम संचार का पता लगाने और ग्राहकों को सचेत करने के लिए पहले ही एआई/एमएल-आधारित प्रणालियाँ तैनात कर दी हैं। प्राधिकरण ने 27 फरवरी, 2026 को टीएसपी को संदिग्ध यूसीसी (अस्पष्ट संचार) पर एआई/एमएल-आधारित जानकारी का उपयोग करके अंतर-ऑपरेटर साझाकरण और संदिग्ध यूसीसी प्रेषकों की आगे की जांच करने के लिए एक निर्देश भी जारी किया।
(ख) उक्त निर्देश के प्रावधानों को विनियमन 21ए की शुरूआत के माध्यम से टीसीसीसीपीआर, 2018 में उपयुक्त रूप से शामिल किया गया है, जो टीएसपी को यूसीसी भेजने के लिए उपयोग किए जाने की उच्च संभावना वाले प्रेषक के कॉलिंग लाइन आईडंटीफिकेशन (सीएलआई) की पहचान करने और टीएसपी के बीच जानकारी साझा करने का आदेश देता है।
