केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू बेंच ने सेवा से जुड़े मामलों को उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से निपटाया है और यह देश में सबसे अधिक मामले निपटाने वाली बेंचों में से एक है। यह बात आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही।
केन्द्रीय मंत्री जम्मू के बहू प्लाजा स्थित केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू बेंच के नए कार्यालय-सह-न्यायालय परिसर का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जम्मू और श्रीनगर स्थित कैट की बेंचों द्वारा बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा यह दर्शाता है कि इस न्यायाधिकरण ने सेवा से जुड़े मामलों में तेज गति और आसानी से न्याय दिलाने की क्षमता विकसित कर ली है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना 1985 में प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा संबंधी मामलों में तेजी से और किफायती न्याय दिलाने के साथ-साथ संवैधानिक न्यायालयों पर बोझ को कम करना था।
उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण के उद्देश्यों को मोटे तौर पर तीन पहलुओं से समझा जा सकता है: सेवा से जुड़े मामलों में शीघ्र न्याय, सरकारी कर्मचारियों के लिए किफायती न्याय और संवैधानिक अदालतों पर बोझ कम करना। कैट में जहां मूल आवेदन दाखिल करने के लिए 50 रुपये की मामूली फीस लगती है, वहीं विविध आवेदनों, पुनर्विचार आवेदनों और अवमानना याचिकाओं के लिए कोई फीस नहीं ली जाती है।
न्यायाधिकरण के समग्र प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कैट की स्थापना से लेकर 30 जून, 2026 तक देश भर में इसके समक्ष कुल 10,01,177 मामले दायर किए गए, जिनमें से 9,32,723 मामलों का निपटारा कर दिया गया। इस प्रकार निपटारे की कुल दर लगभग 93.16 प्रतिशत रही।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जम्मू और श्रीनगर स्थित कैट के बेंचों का अनुभव खासकर इसलिए उल्लेखनीय रहा है क्योंकि पुराने जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय से काफी अधिक काम वहां स्थानांतरित किया गया था और न्यायाधिकरण में नए मामले भी आए थे। 30 जून 2026 तक, जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर 20,984 मामले आए थे। जबकि, बेंच के समक्ष 20,405 नए मामले दायर किए गए थे। तदनुसार, इन दोनों श्रेणियों में से क्रमशः 18,392 और 13,952 मामलों का निपटारा किया गया। कुल मिलाकर 41,389 मामले आए और बहुत कम मामले ही लंबित बचे।
