पुलिस स्मृति दिवस पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ‘Fight Against Drugs’ संदेश वाली देशव्यापी मोटरसाइकिल रैली को भी रवाना किया। कार्यक्रम में सांसद कृष्ण प्रसाद टेनेटी और राजीव कुमार, केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आसूचना ब्यूरो के निदेशक महेश दीक्षित तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर उपस्थित थे। अन्य केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
अपने संबोधन में शाह ने राष्ट्र की सेवा में प्राण न्योछावर करने वाले पुलिसकर्मियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद करीब आठ दशकों में भारत ने जो सम्मान अर्जित किया है, उसकी नींव में सुरक्षा बलों का बलिदान है। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा में जवानों के योगदान को याद किया।
शाह ने 2026 को भारतीय पुलिस के लिए महत्वपूर्ण वर्ष बताते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 को देश को नक्सलवाद से मुक्ति मिली। उनके अनुसार, 1981 से मार्च 2026 तक नक्सल हिंसा में 3600 से अधिक जवान और लगभग 13,700 नागरिक मारे गए। उन्होंने कहा कि पाँच दशक पुरानी समस्या से बाहर आने और विकास की ओर बढ़ने में इन 3600 जवानों का बलिदान आधार बना। शहीदों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों की ओर से कृतज्ञता जताई।
पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास बताते हुए शाह ने लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में 21 अक्टूबर 1959 की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि चीन की सेना के हमले का सामना करते हुए केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 10 जवानों ने प्राणों का बलिदान दिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने देश की भूमि की रक्षा का संकल्प निभाया। उनकी स्मृति में हर वर्ष 21 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता है।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया था। यह स्मारक शहीद पुलिसकर्मियों को समर्पित है और आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य के प्रति प्रेरित करता है। उन्होंने इसे नागरिकों की श्रद्धा का स्थल बताते हुए कहा कि लोग यहां 36,852 पुलिसकर्मियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
गृह मंत्री ने पुलिस सेवा की कठिनाइयों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन, होली, दीपावली और ईद जैसे त्योहारों पर जब नागरिक परिवारों के साथ होते हैं, तब पुलिसकर्मी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभालते हैं। परिवार से दूर रहकर जीवन का महत्वपूर्ण समय देश को समर्पित करने को उन्होंने बड़ी सेवा बताया।
शाह ने पुलिस और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के धैर्य, अनुशासन और समर्पण की सराहना की। उन्होंने पुलिसकर्मियों को आंतरिक सुरक्षा की पहली और अंतिम पंक्ति बताया। सीमा सुरक्षा, चुनाव, त्योहार और प्रदर्शन के दौरान उनके दायित्वों का उल्लेख करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में CAPFs की भूमिका को अहम कहा। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश और बिहार में चुनावी हिंसा समाप्त करने के बाद हाल के बंगाल विधानसभा चुनाव में भी किसी की मृत्यु के बिना मतदान प्रक्रिया पूरी हुई। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों की उपलब्धि और देश को चुनावी हिंसा से मुक्त करने की दिशा में नया मानक बताया।
कश्मीर, पूर्वोत्तर और वाम उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि वहां शांति और विकास का वातावरण बना है। उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण और पूर्वोत्तर में समझौतों के बाद हजारों लोगों के हथियार छोड़ने की बात कही। नक्सलवाद समाप्त करने के प्रयासों के लिए उन्होंने पुलिस और CAPFs को श्रेय दिया तथा विशेष रूप से CRPF, कोबरा बटालियन और छत्तीसगढ़ पुलिस की प्रशंसा की।
शाह ने कहा कि चुनौतियां अभी बाकी हैं। उन्होंने 2026 के शेष समय तथा 2027, 2028 और 2029 में संयुक्त अभियान चलाकर 31 दिसंबर 2029 तक देश को ड्रग्स की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य बताया। उन्होंने नशे को आने वाली पीढ़ियों, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए चुनौती कहा। पुलिस बलों से उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बने ‘नशा मुक्त भारत’ रोडमैप को लागू करने का आह्वान किया।
रवाना की गई रैली में लगभग 90 मोटरसाइकिल सवार शामिल हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के प्रतिनिधि हैं। CRPF, CISF, BSF, SSB, ITBP, NSG तथा RPF, NDRF और NIA के सवार भी हिस्सा ले रहे हैं। ‘Fight Against Drugs’ संदेश वाली इस देशव्यापी पहल के प्रतिभागी गुजरात के एकता नगर पहुंचकर एकता परेड-2026 में शामिल होंगे।
