पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में 'वन और वृक्ष संसाधनों के आकलन में नवीनतम प्रौद्योगिकियों का लाभ' विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह भी उपस्थित थे।
कार्यशाला में राज्यों के वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों को वन और वृक्ष संसाधनों के मूल्यांकन, निगरानी और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण की पड़ताल करने के लिए एक साथ लाया गया। इसमें विषयों पर तीन तकनीकी सत्र-वन सीमाओं का डिजिटलीकरण; वन और वृक्ष आवरण मूल्यांकन; और कार्बन स्टॉक का अनुमान शामिल हैं।
Chaired the workshop on Leveraging Latest Technologies in assessment of forest and tree resources organised by @ForestSurvey in New Delhi today. The workshop was attended by State Forest Departments, Scientific institutions, scientists, technology experts. There were enriching… pic.twitter.com/D3aOy1lGRY
श्री यादव ने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा कि मनुष्य प्रकृति से ऊपर नहीं है और उसके साथ सह-अस्तित्व की दिशा में काम करके उसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों पर डेटा को मजबूत करने, निर्णय लेने में सुधार करने और विशेष रूप से प्रकृति-आधारित समाधानों के माध्यम से भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं में तेजी लाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री यादव ने कहा कि वन और वृक्षों के आवरण के माध्यम से कार्बन सिंक बढ़ाना यूएनएफसीसीसी के तहत तीसरा एनडीसी (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान) लक्ष्य है और वन संरक्षण और हरित आवरण के प्रलेखन के लिए एक प्रमुख संस्थान के रूप में भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) की महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराया। भारत ने 1987 से एफएसआई के माध्यम से वन और वृक्ष संसाधनों का नियमित द्विवार्षिक मूल्यांकन किया है, जिसमें भारत वन स्थिति रिपोर्ट (आईएसएफआर) परिवर्तनों की निगरानी और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग का समर्थन करने के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार के रूप में कार्य कर रही है।
