व्यापार और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इस एफटीए पर 27 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।
आज, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले ने एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बातचीत की और दोनों देशों में आंतरिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद समझौते के लागू होने की तिथि की घोषणा की। न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर 2026 को इससे संबंधित कानून पारित किया था।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और न्यूजीलैंड ने अपने जुड़ाव को लगातार गहरा और व्यापक बनाया है। जुलाई 2026 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की न्यूजीलैंड यात्रा (चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा) ने द्विपक्षीय संबंधों को और गति दी और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए के शीघ्र कार्यान्वयन के महत्व पर जोर दिया। इस यात्रा ने संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति को भी रेखांकित किया, जिसमें भारत और न्यूजीलैंड ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की और 'भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप टू 2030' को एक साझा ढांचे के रूप में स्वीकार किया। इसका उद्देश्य अगले चार वर्षों में सहयोग को दिशा देना और 2030 तक वस्तुओं व सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुंचाना है। एफटीए का परिचालन 'रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप टू 2030' की महत्वाकांक्षाओं को ठोस आर्थिक परिणामों में बदलने के लिए एक प्रमुख माध्यम के रूप में कार्य करेगा।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, “भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति देगा, दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाएगा, बड़े पैमाने पर उत्पादन के लाभ को सक्षम करेगा और समग्र प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में योगदान देगा।” चुनी गई तारीख के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “हमने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के लिए दशहरा-विजयादशमी का शुभ दिन चुना है। मुझे विश्वास है कि इसका लागू होना उन सभी बाधाओं को दूर करेगा, जो हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश संबंधों के बीच मौजूद थीं और दोनों देशों के लोगों की समृद्धि सुनिश्चित करेगा।”
